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Case: भीमपुर विकास खंड में सामूहिक नकल का प्रकरण

भीमपुर विकास खंड में सामूहिक

टीचर सस्पेंड, केंद्राध्यक्ष, सहायक केंद्राध्यक्ष के खिलाफ कार्यवाही प्रस्तावित

Case: बैतूल। एक तरफ सरकार नकल रोकने के लिए कानून बनाने की तैयारी कर रही है। तो दूसरी तरफ सिस्टम नकल रोकने में नाकाम नजर आ रहा है। इसकी बानगी भीमपुर विकासखंड के ग्राम कासमारखंडी में दिखाई दी। यहां पर एक महिला टीचर 5 वीं बोर्ड की परीक्षा में सामूहिक नकल का रही थी। यह टीचर प्रश्र पत्र के उत्तरों को ब्लैक बोर्ड पर लिखती नजर आ रही है। जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो इसका संज्ञान लेकर प्रशासन ने संबंधित महिला टीचर को तत्काल सस्पेंड कर दिया है। अब केंद्राध्यक्ष और सहायक केंद्राध्यक्ष के खिलाफ कार्यवाही प्रस्तावित की जा रही है। सवाल यही है कि बच्चों को साल भर अच्छे से पढ़ाया जाता तो उन्हें नकल कराने की जरूरत नहीं थी।


क्या है पूरा मामला?


भीमुपर विकासखंड के एकीकृत माध्यमिक शाला कासमारखंडी में 25 फरवरी को कक्षा 5 वीं की बोर्ड परीक्षा के दौरान शिक्षिका श्रीमती संगीता विश्वकर्मा द्वारा नकल कराए जाने का मामला वायरल वीडियो के माध्यम से सामने आया था। इस मामले में कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने कार्यवाही के निर्देश दिए थे और जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त श्रीमती शिल्पा जैन ने ततत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इस मामले की जांच की जा रही है।


दो के खिलाफ कार्यवाही प्रस्तावित


कासमारखंडी के माध्यमिक स्कूल में सामूहिक नकल के प्रकरण को लेकर जांच की जा रही है। इस मामले को लेकर भीमपुर बीईओ रमेश कौशिक ने बताया कि इस केंद्र पर बलदेव सलामे केंद्राध्यक्ष हैं और सोमलाल सलामे सहायक केंद्राध्यक्ष हैं। दोनों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और इनके खिलाफ कार्यवाही भी प्रस्तावित की जा रही है। नोटिस के संतुष्टिजनक जवाब नहीं आने पर इन दोनों के खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी। वहीं बीआरसी आरडी जायसवाल ने बताया कि परीक्षा के पहले सभी टीचर और केंद्राध्यक्षों को निर्देश दिए गए थे कि परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की नकल नहीं होनी चाहिए।


दो साल में दूसरा प्रकरण


जनजातीय बाहुल्य भीमपुर विकासखंड में दो साल में सामूहिक नकल के दो प्रकरण सामने आ गए हैं। 2023 में हायर सेकेंडरी की परीक्षा के दौरान प्रभुढाना परीक्षा केंद्र पर सामूहिक नकल का प्रकरण उडऩदस्ते के द्वारा बनाया गया था। इस मामले में 23 लोगों को सस्पेंड किया गया था वहीं दो की सेवा समाप्ति की गई थी। इस प्रकरण के बाद भी जनजातीय विभाग ने सबक नहीं लिया और उसका परिणाम 2025 में फिर दूसरे सामूहिक नकल प्रकरण के रूप में सामने आया है।


क्यों जरूरत पड़ती है नकल कराने की?


सामूहिक नकल प्रकरण के मामले में जानकारों का मानना है कि इसके लिए जितने शिक्षक दोषी है उतना ही सिस्टम भी दोषी है। 2022 में 13 साल बाद पुन: 5 वीं और 8 वीं का बोर्ड पैटर्न प्रारंभ कर दिया है। भीमपुर विकासखंड से आमतौर पर स्कूल बंद रहने और टीचर के नहीं जाने की शिकायत साल भर आते रहती हैं। इस विकासखंड में कई स्कूल ऐसे हैं जहां सिंगल टीचर है और कई टीचर ऐसे हैं जिनका स्कूल दूर है जिसके कारण स्कूलों में नियमित पढ़ाई नहीं का अभिभावक आरोप लगाते रहते हैं। इस सामूहिक नकल प्रकरण से यह बात स्पष्ट होती है कि अगर बच्चे साल भर पढ़ते तो उन्हें नकल कराने की जरूरत नहीं पड़ती। अगर साल भर स्कूलों की बेहतर तरीके से मानीटरिंग की जाए तो स्कूलों का रिजल्ट बेहतर आ सकता है।

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