100 करोड़ से बनेगा अत्याधुनिक “इंजीनियरिंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर
Training Hub: भोपाल। मध्यप्रदेश अब देश में इंजीनियरिंग प्रशिक्षण और क्वालिटी टेस्टिंग का नया केंद्र बनने जा रहा है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) भोपाल में 100 करोड़ रुपए की लागत से “इंजीनियरिंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर” और वर्ल्ड-क्लास टेस्टिंग लैब स्थापित करने जा रहा है। यह अत्याधुनिक संस्थान न केवल प्रदेश के 1500 से अधिक इंजीनियरों, बल्कि देशभर के तकनीकी पेशेवरों और छात्रों के लिए भी बड़ा प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म बनेगा।
🔹 बाहर ट्रेनिंग पर हर साल 15 करोड़ का खर्च, अब मप्र बनेगा “ट्रेनिंग एक्सपोर्टर स्टेट”
अभी तक पीडब्ल्यूडी, रोड और बिल्डिंग डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के इंजीनियरों को ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद, दिल्ली और गुजरात भेजा जाता है, जिस पर हर साल करीब 15 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।
इंस्टीट्यूट शुरू होने के बाद यह खर्च बचेगा और मध्यप्रदेश अन्य राज्यों को भी प्रशिक्षण सुविधा देकर “ट्रेनिंग एक्सपोर्टर स्टेट” बनेगा।
🔹 रायसेन रोड पर 20 एकड़ में बनेगा सेंटर
सेंटर के लिए भोपाल बायपास रायसेन रोड पर 20 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है।
यहां होंगे—
- 30 से 60 सीटों वाले स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल लैब्स
- 200 से 500 इंजीनियरों के लिए सेमिनार हॉल
- वर्कशॉप, फील्ड ट्रेनिंग, मशीनिंग एरिया और ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर
- हॉस्टल, हेल्थ सेंटर, लाइब्रेरी और डिजिटल नेटवर्किंग जोन
🔹 अब राज्य में ही होगी क्वालिटी टेस्टिंग
इंस्टीट्यूट से जुड़ी वर्ल्ड-क्लास टेस्टिंग लैब प्रदेश की पहली एकीकृत क्वालिटी जांच सुविधा होगी।
यहां कंक्रीट, सॉयल, बिटुमिन टेस्टिंग, मटेरियल एनालिसिस, ड्रोन सर्विलांस, साइट मॉनिटरिंग और रियल-टाइम डेटा ऑडिटिंग की सुविधाएं होंगी।
अब सड़क, पुल और सरकारी बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स के नमूने बाहर भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय और करोड़ों रुपये की बचत होगी।
🔹 हर साल 15 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स, अब अपनी लैब से होगी जांच
मप्र में हर साल करीब 15 हजार करोड़ रुपये के रोड और बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स होते हैं।
नई लैब से इनकी गुणवत्ता जांच राज्य के भीतर ही संभव होगी।
इससे 15 करोड़ ट्रेनिंग खर्च और 5 करोड़ टेस्टिंग खर्च की बचत होगी।
🔹 लक्ष्य 2026 तक संचालन
तीन सदस्यीय टीम पहले ही हैदराबाद सेंटर का निरीक्षण कर चुकी है और अब दिल्ली व गुजरात के मॉडल देखने जाएगी।
इन दौरों के आधार पर दिसंबर 2025 तक डिजाइन और फंक्शनल स्ट्रक्चर तैयार होगा।
लक्ष्य है कि 2026 तक यह पूरी तरह संचालित हो जाए।
🔹 मंत्री बोले– “मप्र बनेगा इंजीनियरिंग ट्रेनिंग का मानक”
पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा—
“हमारा लक्ष्य सिर्फ एक ट्रेनिंग सेंटर बनाना नहीं, बल्कि इंडिया का बेंचमार्क इंजीनियरिंग ट्रेनिंग मॉडल तैयार करना है। इसमें सिर्फ हमारे इंजीनियर नहीं, बल्कि अन्य राज्यों और कॉलेजों के छात्र भी सीख सकेंगे। जरूरत पड़ी तो बजट बढ़ाने में भी संकोच नहीं करेंगे।”
साभार…
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