Vastu: भारतीय संस्कृति में स्वच्छता को सिर्फ सफाई का काम नहीं माना गया, बल्कि इसे संस्कार, आध्यात्मिकता और समृद्धि से जोड़ा गया है। मान्यता है कि जहां स्वच्छता होती है, वहां देवी-देवताओं का वास होता है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
माता लक्ष्मी का वास: स्वच्छता का आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार—
- स्वच्छता सतोगुण का प्रतीक है।
- साफ-सुथरा घर वास्तु दोष दूर करता है।
- शांति, समृद्धि और सौभाग्य का मार्ग खोलता है।
- मां लक्ष्मी को स्वच्छता अत्यंत प्रिय है, इसलिए गंदे या अव्यवस्थित स्थानों पर उनका वास नहीं माना जाता।
पुरुषों द्वारा झाड़ू-पोंछा करना क्यों माना जाता है शुभ?
अक्सर सफाई को महिलाओं का कार्य माना जाता है, लेकिन हिंदू परंपराओं में यह माना गया है कि—
1. अहंकार का क्षय
जब पुरुष सेवा भाव से झाड़ू-पोंछा करते हैं, तो यह अहंकार को तोड़ता है और विनम्रता लाता है।
जहां अहंकार नहीं रहता, वहां कृपा और समृद्धि स्वतः आती है।
2. सौहार्द और समृद्धि आती है
पुरुषों द्वारा सफाई करने से घर में:
- आपसी सम्मान बढ़ता है
- प्रेम और सामंजस्य गहराता है
- लक्ष्मी का स्थायी निवास माना जाता है
3. कर्मों की शुद्धि
धार्मिक मान्यता के अनुसार, झाड़ू लगाना सिर्फ धूल हटाना नहीं है, बल्कि यह अपने कर्मों का पवित्रीकरण भी है।
सप्ताह में एक बार झाड़ू लगाने से:
- मन हल्का होता है
- भाग्योदय के अवसर बढ़ते हैं
- मानसिक शांति मिलती है
परिवार में बढ़ता है सम्मान और प्रेम
जब घर के कामों में पुरुष और महिलाएं मिलकर हाथ बंटाते हैं, तो:
- सहयोग की भावना बढ़ती है
- रिश्तों में तनाव कम होता है
- सम्मान और प्रेम बढ़ता है
- घर का वातावरण सुखद और शांत रहता है
हिंदू दर्शन कहता है—
“जो व्यक्ति किसी भी काम को छोटा नहीं समझता, उसके कर्म पवित्र माने जाते हैं।”
ऐसे लोगों पर देवी-देवताओं की विशेष कृपा रहती है।
आधुनिक विज्ञान भी देता है इसकी पुष्टि
मनोवैज्ञानिक शोध बताते हैं कि जब परिवार का हर सदस्य घर की सफाई में योगदान देता है, तो:
- तनाव कम होता है
- मानसिक संतुष्टि बढ़ती है
- घर में सकारात्मकता रहती है
- संबंध मजबूत होते हैं
सफाई करना एक तरह का मेंटल डीटॉक्स भी है, जिससे नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
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