साउथ फिल्मों की शूटिंग से बदली आदिवासी अंचल की तस्वीर
Film industry: छिंदवाड़ा। मायानगरी मुंबई के फिल्म स्टूडियो में दिखने वाले नज़ारे अब पातालकोट और सतपुड़ा की वादियों में भी नजर आने लगे हैं। छिंदवाड़ा जिले के पातालकोट और तामिया क्षेत्र में इन दिनों तमिल और तेलुगू फिल्मों की शूटिंग शुरू हो गई है। साउथ फिल्म इंडस्ट्री के निर्माता-निर्देशक इन प्राकृतिक लोकेशनों से इतने प्रभावित हुए हैं कि यहां लगातार फिल्मों और वीडियो एलबम की शूटिंग का सिलसिला शुरू हो गया है।
साउथ फिल्मों में दिखेगा पातालकोट
कवि भवानी प्रसाद मिश्र की अमर पंक्तियों “सतपुड़ा के घने जंगल…” से पहचाने जाने वाले इन जंगलों में अब कैमरों की लाइट और एक्शन की गूंज सुनाई दे रही है। सतपुड़ा की घाटियां, हरियाली, पहाड़, गांवों की गलियां, झरने, कोहरा और धूप—ये सब साउथ फिल्म इंडस्ट्री को खूब भा रहे हैं।
यहां तेलगू फिल्म ‘भैरवी’ की शूटिंग शुरू हो चुकी है, जबकि ‘टारगेट’ और ‘आडू बुलेट रा’ नाम की दो अन्य फिल्मों की शूटिंग भी जल्द शुरू होने वाली है।
60 दिनों तक चलेगी शूटिंग
जिला प्रशासन और स्थानीय स्तर पर फिल्म निर्माण से जुड़े स्टाफ के सहयोग से सुरक्षित माहौल तैयार किया गया है। नतीजतन, आने वाले करीब 60 दिनों तक तामिया, पातालकोट और आसपास के क्षेत्रों में लगातार तीन फिल्मों और वीडियो एलबम की शूटिंग प्रस्तावित है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।
तामिया में साउथ कलाकारों का डेरा
जिला पंचायत सीईओ अग्रिम कुमार ने बताया कि कलेक्टर हरेंद्र नारायण के निर्देशन में तामिया में फिल्म शूटिंग के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड और जिला प्रशासन के सहयोग से शूटिंग से जुड़ी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे तय समय में शूटिंग पूरी हो रही है।
होम स्टे और पर्यटन ग्राम भी बनेंगे शूटिंग का हिस्सा
लाइन प्रोड्यूसर उमरगुल खान ने बताया कि फिल्मों की शूटिंग के दौरान तामिया, पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस, पाटन गांव, तामिया व्यू प्वाइंट, तुलतुला मंदिर और तामिया बाजार जैसी लोकेशनों को फिल्माया जाएगा।
इसके साथ ही मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा विकसित पर्यटन ग्राम काजरा और सावरवानी के अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त होम स्टे भी फिल्मों में दिखाए जाएंगे।
कम बजट में मिलती है ओरिजिनल लोकेशन
मुंबई में फिल्म निर्माण से जुड़े छिंदवाड़ा निवासी इंद्रजीत सिंह बैस ने बताया कि स्टूडियो में सेट बनाने की तुलना में ओरिजिनल लोकेशन पर शूटिंग कम खर्चीली और ज्यादा प्रभावी होती है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है और दर्शकों को प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलते हैं। छिंदवाड़ा और आसपास के क्षेत्र में ऐसी कई लोकेशन हैं, जो अब फिल्मकारों की पहली पसंद बन रही हैं।
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