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Affected: बोर्ड परीक्षा से पहले शिक्षकों की कमी से जूझ रहे सरकारी स्कूल, पढ़ाई हो रही प्रभावित

बोर्ड परीक्षा से पहले शिक्षकों की

Affected: भोपाल। मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में अब महज डेढ़ महीने का समय शेष रह गया है। एक ओर स्कूल शिक्षा विभाग रिजल्ट सुधारने के लिए सुपर-प्लान तैयार करने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में सरकारी स्कूल शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं।

प्रदेशभर में करीब 20 हजार शिक्षक चुनावी कार्यों में तैनात किए गए हैं। इसका सीधा असर स्कूलों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। भोपाल जिले की ही बात करें तो लगभग 400 शिक्षक चुनाव ड्यूटी में लगाए गए हैं, जबकि करीब 200 शिक्षिकाएं संतान पालन अवकाश (सीसीएल) पर हैं। इससे कई स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं।

एकल शिक्षक स्कूल सबसे ज्यादा प्रभावित

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी चिंताजनक है। कई स्कूल ऐसे हैं जो केवल एक या दो शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में जब इन शिक्षकों की ड्यूटी चुनावी कार्यों में लगा दी जाती है, तो स्कूलों में ताले लटकने की नौबत आ जाती है। कुछ स्कूलों में आधे दिन ही कक्षाएं संचालित हो पा रही हैं।

एक-एक स्कूल से 15 से 18 शिक्षक बाहर

सांदीपनि विद्यालय गोविंदपुरा में 17 शिक्षक चुनाव ड्यूटी में हैं, जबकि एक शिक्षक सीसीएल पर है। वहीं, सांदीपनि विद्यालय निशातपुरा में कुल 30 शिक्षकों में से गणित, भौतिकी, रसायन, अंग्रेजी, इतिहास और जीवविज्ञान विषय के आठ उच्च माध्यमिक शिक्षक बीएलओ के रूप में तैनात हैं। इसके अलावा चार महिला शिक्षिकाएं सीसीएल और मातृत्व अवकाश पर हैं।

पीएमश्री शासकीय नवीन कन्या विद्यालय में आठ शिक्षक अनुपस्थित हैं, जिनमें पांच बीएलओ ड्यूटी और तीन मेडिकल अवकाश पर हैं। सरोजनी नायडू कन्या विद्यालय से तीन शिक्षक सुपरवाइजर ड्यूटी में लगाए गए हैं। वहीं, सांदीपनि विद्यालय कमला नेहरू में छह शिक्षक चुनाव ड्यूटी और दो शिक्षक सीसीएल पर हैं।

विभाग का दावा—अवकाश होंगे सीमित

जिला शिक्षा अधिकारी एन.के. अहिरवार ने बताया कि,
“जिले में करीब 400 शिक्षक चुनाव ड्यूटी में लगाए गए हैं। जितनी शिक्षिकाएं सीसीएल पर हैं, उनका अवकाश शीतकालीन छुट्टियों के बाद समाप्त किया जा रहा है। फरवरी तक किसी भी शिक्षक का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा।”

हालांकि, शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड परीक्षाओं से ठीक पहले इस तरह की व्यवस्थागत कमी छात्रों के परिणामों पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।

साभार.. 

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