इंदौर की घटना के बाद भी प्रशासन बेपरवाह, एक महीने से बंद है जल आपूर्ति
Drinking water crisis छिंदवाड़ा। इंदौर में दूषित पानी पीने से लोगों की मौत और सैकड़ों के बीमार होने की घटनाओं के बावजूद छिंदवाड़ा जिले का सरकारी तंत्र सबक लेने को तैयार नजर नहीं आ रहा है। जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित बांडाबोह गांव में पिछले एक महीने से नल-जल योजना पूरी तरह बंद है। हालात यह हैं कि ग्रामीणों को मजबूरी में नहर और खुले कुओं का दूषित पानी पीना पड़ रहा है।
नहर का गंदा पानी पीने को मजबूर ग्रामीण
गांव की निवासी बिंदु बाई कराड़े ने बताया कि गांव में नल-जल योजना के तहत नल लगाए जा चुके हैं और पानी की टंकी भी बनकर तैयार है, लेकिन नलों में पानी नहीं आता।
उन्होंने कहा,
“एक साल से अधिकतर समय ट्यूबवेल की मोटर खराब रहती है। बीते एक महीने से हम नहर का गंदा पानी पीने और रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। इसके कारण कई लोग बीमार पड़ रहे हैं। सरपंच से लेकर अधिकारियों तक शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।”
सरपंच पर लापरवाही और भेदभाव के आरोप
स्थानीय किसान रमन कुमार परतेती ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गांव में करीब एक साल से पानी की समस्या बनी हुई है।
उनका आरोप है,
“हमने कई बार सरपंच से शिकायत की, लेकिन उन्होंने कहा कि आपके गांव से मुझे वोट नहीं मिले, इसलिए मैं यहां की समस्या क्यों देखूं।”
सरपंच ने आरोपों को किया खारिज
वहीं ग्राम सरपंच सरला सोमकेकंवर ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि जल आपूर्ति बाधित होने का कारण तकनीकी समस्या थी।
उन्होंने बताया,
“सचिव के डिजिटल सिग्नेचर में दिक्कत होने के कारण बिल पास नहीं हो पा रहा था। अब डिजिटल सिग्नेचर तैयार हो गए हैं और ट्यूबवेल की मोटर भी ठीक कर दी गई है। जल्द ही गांव में नियमित रूप से पानी की सप्लाई शुरू हो जाएगी।”
अधिकारियों की कार्रवाई सिर्फ पंचनामा तक सीमित
गांव के ही रोहन भलावी ने बताया कि गांव के पास एक तालाब है, जिससे नहर खेतों में सिंचाई के लिए जाती है। उसी नहर के पानी का उपयोग ग्रामीण घरेलू कामों और पशुओं के लिए कर रहे हैं।
उन्होंने कहा,
“पीने के लिए कभी-कभी किसी के खेत के कुएं या ट्यूबवेल से पानी लाना पड़ता है, लेकिन कई बार खेत मालिक पानी भरने से मना कर देते हैं। अधिकारियों से शिकायत की, वे आते हैं, पंचनामा बनाते हैं और चले जाते हैं, समस्या जस की तस बनी रहती है।”
पेयजल संकट से बढ़ रहा स्वास्थ्य जोखिम
दूषित पानी के उपयोग से गांव में बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद न तो स्थायी समाधान किया गया है और न ही वैकल्पिक शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गई है, जिससे प्रशासन की संवेदनहीनता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
साभार…
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