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Silk Revolution: मध्य प्रदेश में रेशम क्रांति: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया संबल

मध्य प्रदेश में रेशम क्रांति: ग्रामीण

3,500 एकड़ में मलबरी रेशम उत्पादन का लक्ष्य, हजारों किसानों और महिलाओं को रोजगार

Silk Revolution: भोपाल। रेशम उत्पादन मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के लिए आर्थिक वरदान बनकर उभर रहा है। राज्य सरकार ने इसकी ठोस शुरुआत कर दी है और आने वाले तीन वर्षों में इसके सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे। मध्य प्रदेश कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा शुरू की गई इस रेशम क्रांति का उद्देश्य किसानों और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।


431 एकड़ में हो रही रेशम की खेती

कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने बताया कि प्रदेश सरकार रेशम उत्पादन को ग्रामीण विकास का मजबूत आधार बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
रेशम संचालनालय के माध्यम से पिछले दो वर्षों में—

  • निजी क्षेत्र में 231 एकड़
  • सरकारी रेशम केंद्रों पर 200 एकड़

कुल 431 एकड़ क्षेत्र में नए मलबरी पौधों का रोपण किया गया है। इससे रेशम उत्पादन के लिए कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ी है और भविष्य की उत्पादन क्षमता को मजबूती मिली है।


5 हजार किसानों को मिला आधुनिक प्रशिक्षण

मंत्री जायसवाल ने बताया कि प्रदेश में—

  • 3,600 मलबरी
  • 850 टसर कोकून उत्पादक किसान

को स्वरोजगार से जोड़ा गया है।
पिछले दो वर्षों में राज्य में—

  • 2.64 लाख किलोग्राम मलबरी कोकून
  • 31.51 लाख टसर कोकून

का उत्पादन हुआ है। इसके साथ ही करीब 5,000 किसानों को आधुनिक कोकून उत्पादन तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे उनकी उत्पादकता और आय में वृद्धि हो रही है।


रेशम उत्पादन से 42 महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’

रेशम उत्पादन ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में भी बड़ा बदलाव लाया है। अब तक प्रदेश में 42 महिलाओं को रेशम उत्पादन के जरिए ‘लखपति दीदी’ के रूप में चिन्हित किया गया है। यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और घरेलू आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है।


कोकून उत्पादन में बड़े लक्ष्य तय

राज्यमंत्री जायसवाल ने बताया कि आगामी तीन वर्षों में—

  • मलबरी कोकून उत्पादन को 1.50 लाख किलोग्राम से बढ़ाकर 4 लाख किलोग्राम
  • टसर कोकून उत्पादन को 40 लाख से बढ़ाकर 70 लाख

तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए मलबरी पौधरोपण क्षेत्र में अतिरिक्त 3,500 एकड़ की वृद्धि की जाएगी।


ई-कॉमर्स से मिलेगा रेशम उत्पादों को बाजार

रेशम उद्योग के प्रचार और प्रशिक्षण के लिए नर्मदापुरम जिले के पचमढ़ी में रेशम इंटरप्रिटेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी।
इसके साथ ही—

  • रेशम उत्पादों की बिक्री ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए की जाएगी
  • ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर में नए प्राकृतिक रेशम शोरूम खोले जाएंगे

6,200 हितग्राहियों को मिलेगा कौशल उन्नयन प्रशिक्षण

आगामी तीन वर्षों में—

  • 6,200 हितग्राहियों को कौशल उन्नयन प्रशिक्षण
  • 150 एकड़ में मलबरी नर्सरी विकास
  • 3,500 एकड़ में नया मलबरी पौधरोपण
  • 16 नई बीज इकाइयों और
  • 10 नई धागाकरण इकाइयों की स्थापना

की जाएगी। इन प्रयासों से प्रदेश में रेशम उत्पादन, रोजगार और ग्रामीण आय को नई गति मिलने की उम्मीद है।

साभार…

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