9 फरवरी से चरणबद्ध प्रदेशव्यापी प्रदर्शन, हड़ताल से चरमराने की आशंका स्वास्थ्य सेवाओं पर
Agitation: भोपाल। मध्य प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले करीब 30 हजार संविदा व आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी अब अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने वर्षों से लंबित मांगों को लेकर 9 फरवरी 2026 से चरणबद्ध प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है।
प्रदेश के शासकीय मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और संजीवनी क्लिनिकों में कार्यरत ये कर्मचारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दैनिक संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं, तो सरकारी अस्पतालों की सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
क्यों बढ़ रहा है आउटसोर्स कर्मचारियों में आक्रोश
संघ के अध्यक्ष कोमल सिंह ने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारी वर्षों से स्थायी प्रकृति का कार्य कर रहे हैं, लेकिन न तो उन्हें नियमित दर्जा मिला और न ही संवैधानिक श्रम अधिकार।
उन्होंने कहा कि शासन द्वारा स्वीकृत 20 से 25 हजार रुपए वेतन के स्थान पर कर्मचारियों को केवल 8 से 12 हजार रुपए ही दिए जा रहे हैं। ठेकेदारी व्यवस्था के कारण वेतन में कटौती, असमानता और सामाजिक सुरक्षा का घोर अभाव बना हुआ है।
कोमल सिंह ने यह भी कहा कि जहां नियमित कर्मचारियों को वेतन संशोधन और महंगाई भत्ता मिलता है, वहीं समान कार्य करने वाले आउटसोर्स कर्मियों के मानदेय में वर्षों तक कोई वृद्धि नहीं होती। इससे न केवल आर्थिक असमानता बढ़ रही है, बल्कि कार्य-प्रेरणा और प्रशासनिक दक्षता भी प्रभावित हो रही है।
इस तरह होगा चरणबद्ध आंदोलन
संघ द्वारा घोषित आंदोलन कार्यक्रम इस प्रकार है—
- 9–10 फरवरी: सीएमएचओ के माध्यम से ज्ञापन
- 16–18 फरवरी: काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन
- 23–24 फरवरी: भोपाल में धरना
- 2 मार्च: जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस
- 10–11 मार्च: कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन
- 7 अप्रैल: भोपाल में जंगी प्रदर्शन
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो स्वास्थ्य सेवाओं में उत्पन्न होने वाली स्थिति की जिम्मेदारी शासन की होगी।
आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
- 5 वर्ष से सेवा दे रहे कर्मचारियों को बिना शर्त नियमित किया जाए या संविदा में मर्ज किया जाए
- यूपी और हरियाणा की तर्ज पर स्थायी नीति बनाकर समाधान
- न्यूनतम 21,000 रुपए मासिक वेतन निर्धारित किया जाए
- 1 अप्रैल से लागू पुनरीक्षित वेतन वृद्धि के अनुसार 11 माह का एरियर भुगतान
- निजी आउटसोर्स एजेंसियों को समाप्त कर सीधे विभाग द्वारा वेतन भुगतान
- नियमित कर्मचारियों की तरह सभी शासकीय अवकाश
- नियमित भर्ती में 50% आरक्षण
- आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी सुविधा लागू की जाए
- साभार…
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