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Historical journey: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को 2 साल: आस्था से विकास तक अयोध्या का ऐतिहासिक सफर

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को 2 साल:

Historical journey: अयोध्या। गुरुवार, 22 जनवरी 2026 का दिन भारतीय इतिहास और सनातन परंपरा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आज रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को दो वर्ष पूरे हो गए हैं। 22 जनवरी 2024 को भव्य वैदिक मंत्रोच्चार और देश–दुनिया की मौजूदगी में अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। इस ऐतिहासिक क्षण के बाद अयोध्या न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का वैश्विक केंद्र बन गई।

पिछले दो वर्षों में 10 करोड़ से अधिक श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर चुके हैं। देश के हर कोने के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल, श्रीलंका और दक्षिण–पूर्व एशिया समेत कई देशों से सनातन धर्म को मानने वाले श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। इस दौरान कई देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्राध्यक्षों ने भी रामलला के दर्शन कर भारत की आध्यात्मिक विरासत के प्रति सम्मान जताया।

राम मंदिर का निर्माण किसी एक पीढ़ी का नहीं बल्कि करीब 500 वर्षों के संघर्ष का परिणाम है। मंदिर निर्माण को लेकर लंबा कानूनी और सामाजिक संघर्ष चला। आखिरकार 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन हुआ और 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य भूमि पूजन कर मंदिर निर्माण की औपचारिक शुरुआत की।

राम मंदिर के निर्माण के साथ ही अयोध्या की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। अब यह सिर्फ एक धार्मिक नगर नहीं, बल्कि एक आधुनिक आध्यात्मिक नगरी के रूप में उभर चुका है। शहर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट, अत्याधुनिक रेलवे स्टेशन, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और चौड़ी सड़कों का विकास हुआ है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 100 फीट चौड़ा राम जन्मभूमि पथ, सुव्यवस्थित दर्शन मार्ग, जगह–जगह एलईडी सूचना स्क्रीन, स्थायी कैनोपी, शुद्ध पेयजल और स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था की गई है। करोड़ों श्रद्धालुओं के सुचारु दर्शन के लिए डिजिटल और स्मार्ट व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं।

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूरे होने के साथ ही अयोध्या आज न सिर्फ आस्था का, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और विकासशील पहचान का प्रतीक बन चुकी है। 🚩

साभार….

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