Retirement: नई दिल्ली। भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने कहा है कि इस समय दुनिया में अंतरिक्ष को लेकर एक नई स्पेस रेस चल रही है, लेकिन इसका मकसद सिर्फ सबसे पहले चांद पर पहुंचना नहीं होना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि मानवता सुरक्षित, टिकाऊ और लंबे समय तक रहने योग्य तरीके से चंद्रमा और अंतरिक्ष में आगे बढ़े।
दिल्ली के अमेरिकन सेंटर में आयोजित ‘आंखें सितारों पर, पैर जमीन पर’ सेमिनार में बोलते हुए सुनीता विलियम्स ने कहा कि अंतरिक्ष अन्वेषण सहयोग, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित होना चाहिए, ताकि किसी एक देश का दबदबा न बने और पूरी मानवता को इसका लाभ मिले। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को अंटार्कटिका मॉडल से जोड़ते हुए कहा कि जैसे वहां सभी देश मिलकर काम करते हैं, वैसे ही अंतरिक्ष में भी साझा प्रयास जरूरी हैं।
27 साल बाद NASA से रिटायरमेंट
सुनीता विलियम्स ने 27 साल की सेवा के बाद NASA से रिटायरमेंट ले लिया है। इसकी घोषणा NASA ने 20 जनवरी को की, जबकि उनकी सेवानिवृत्ति 27 दिसंबर 2025 से प्रभावी मानी गई है।
60 वर्षीय सुनीता ने 1998 में NASA जॉइन किया था और उन्होंने तीन अंतरिक्ष अभियानों में हिस्सा लेते हुए कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए।
9 स्पेसवॉक और रिकॉर्ड
सुनीता विलियम्स ने
- 9 स्पेसवॉक किए
- कुल 62 घंटे 6 मिनट अंतरिक्ष में चहलकदमी की
यह किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा किया गया सबसे ज्यादा स्पेसवॉक रिकॉर्ड है।
वे अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली महिला भी बनीं।
धरती को अंतरिक्ष से देखने का अनुभव
उन्होंने कहा,
“जब आप अंतरिक्ष से धरती को देखते हैं तो महसूस होता है कि हम सब एक हैं। इससे यह एहसास और मजबूत होता है कि हमें मिलकर काम करना चाहिए।”
स्पेस जंक बनी बड़ी चुनौती
सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में फैलते कचरे (स्पेस डेब्रिस) को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि इसे नियंत्रित करने के लिए नई तकनीक की जरूरत है।
भारत आना घर वापसी जैसा
भारत दौरे पर आईं सुनीता ने कहा कि भारत आना उन्हें घर लौटने जैसा लगता है, क्योंकि उनके पिता गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव से थे।
चंद्रमा पर जाने के सवाल पर उन्होंने मुस्कराते हुए कहा,
“मैं चांद पर जाना चाहती हूं, लेकिन मेरे पति मुझे इजाजत नहीं देंगे। अब घर लौटने और जिम्मेदारी अगली पीढ़ी को सौंपने का समय है।”
कल्पना चावला के परिवार से मुलाकात
सुनीता विलियम्स ने दिवंगत अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की मां संयोगिता चावला और बहन दीपा चावला से भी मुलाकात की। उन्होंने मंच से उतरकर कल्पना की मां को गले लगाया।
संयोगिता चावला ने बताया कि 2003 में कोलंबिया हादसे के बाद सुनीता करीब तीन महीने तक उनके घर आती थीं और परिवार को सहारा देती थीं।
आखिरी मिशन 8 दिन का था, बन गया 9 महीने का
सुनीता का आखिरी मिशन 2024 में 8 दिन के लिए ISS गया था, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण वह वहां साढ़े नौ महीने तक रहीं।
वे अपनी टीम के साथ 19 मार्च 2025 को पृथ्वी पर लौटी थीं। यह मिशन बोइंग स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट की क्षमता को परखने के लिए था।
भारत में 4–5 दिन के प्रवास पर आईं सुनीता विलियम्स कई कार्यक्रमों में हिस्सा ले रही हैं और उनके केरल लिटरेचर फेस्टिवल में भी शामिल होने की संभावना है। 🚀
साभार….
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