छोटी EMI के जाल में न फंसें, सही प्लानिंग से टैक्स बचत को बनाएं असली फायदा
Precautions: ग्वालियर। ग्वालियर व्यापार मेले में 50 प्रतिशत रोड टैक्स छूट का नोटिफिकेशन जारी होते ही ऑटोमोबाइल सेक्टर में रौनक लौट आई है। नई कार खरीदना हर किसी के लिए खुशी का पल होता है और मेले की यह बड़ी छूट इस खुशी को और बढ़ा देती है। लेकिन अगर यह खरीदारी फाइनेंस यानी लोन पर की जा रही है, तो थोड़ी सी लापरवाही आपकी टैक्स बचत को ब्याज में बदल सकती है।
अक्सर मेले की चकाचौंध में ग्राहक सिर्फ कम EMI देखकर लोन ले लेते हैं, जबकि असली खर्च ब्याज, प्रोसेसिंग फीस और छिपे चार्ज में छिपा होता है। सही जानकारी के बिना किया गया फाइनेंस टैक्स छूट से हुई बचत को भी खत्म कर सकता है।
सिर्फ ब्याज दर नहीं, कुल भुगतान देखें
चार्टर्ड अकाउंटेंट आशीष पारेख के अनुसार, अलग-अलग बैंक कम ब्याज दर का दावा करते हैं, लेकिन सिर्फ ब्याज पूछना काफी नहीं है। प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज और जीएसटी जोड़कर लोन की कुल लागत काफी बढ़ जाती है। इसलिए यह जरूर जानें कि लोन अवधि पूरी होने तक कुल कितनी रकम चुकानी पड़ेगी।
जितना ज्यादा डाउन पेमेंट, उतना कम ब्याज
जीरो डाउन पेमेंट आकर्षक लगता है, लेकिन इसका मतलब होता है ज्यादा लोन और ज्यादा ब्याज। रोड टैक्स में मिली छूट की राशि को डाउन पेमेंट में जोड़ देने से मूल रकम कम हो जाती है, जिससे EMI और कुल ब्याज दोनों घट जाते हैं।
लोन की अवधि सोच-समझकर तय करें
लंबी अवधि का लोन EMI कम दिखाता है, लेकिन कुल ब्याज ज्यादा पड़ता है। वहीं छोटी अवधि का लोन जल्दी खत्म होता है और ब्याज भी कम लगता है। अपनी मासिक आय और खर्च को देखते हुए संतुलित अवधि चुनना ही समझदारी है।
प्री-पेमेंट और फोरक्लोजर चार्ज जरूर जांचें
अगर भविष्य में लोन जल्दी चुकाना चाहें और बैंक भारी चार्ज लगाए, तो नुकसान हो सकता है। इसलिए दस्तखत करने से पहले प्री-पेमेंट और फोरक्लोजर से जुड़ी शर्तों को अच्छी तरह पढ़ लें।
ग्वालियर मेले की टैक्स छूट वाकई कार खरीदारों के लिए बड़ा मौका है, लेकिन सही फाइनेंस प्लानिंग के बिना यह फायदा अधूरा रह सकता है। समझदारी से लिया गया लोन ही इस ऑफर को सच में फायदेमंद बना सकता है।
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