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Weapon license: ढाई हजार से ज्यादा फौजियों के शस्त्र लाइसेंस अटके, रिटायर्ड सैनिक सालों से भटक रहे

ढाई हजार से ज्यादा फौजियों के

दूसरे राज्यों से बने लाइसेंस का भिंड में ट्रांसफर नहीं, थानों में जमा बंदूकें और घरों में फंसे हथियार

Weapon license: भिंड। भिंड जिले के ऐंहतार गांव के रहने वाले सेवानिवृत्त सैनिक सुनील शर्मा की परेशानी आज जिले के हजारों रिटायर्ड और वर्तमान सैनिकों की हकीकत बन चुकी है। चार साल पहले रिटायर होने के बाद उन्होंने सोचा था कि किसी प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी में गार्ड की नौकरी करेंगे, लेकिन शस्त्र लाइसेंस के ट्रांसफर में फंसी प्रक्रिया ने उनकी राह रोक दी। उन्होंने अपनी बंदूक थाने में जमा कर दी है और अब सालों से यह इंतजार कर रहे हैं कि कब उनका लाइसेंस भिंड जिले में स्थानांतरित होगा।

भिंड जिले में ऐसे मामलों की संख्या लगभग ढाई हजार से अधिक बताई जा रही है। रिटायर्ड ही नहीं, कई वर्तमान जवान भी दूसरे राज्यों से बने लाइसेंस के कारण अपने हथियार घर पर रखने को मजबूर हैं, क्योंकि ट्रांसफर और रिन्युअल की प्रक्रिया लंबित है।

कई राज्यों से बने हैं फौजियों के लाइसेंस


दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि भिंड जिले के अधिकांश फौजी अपनी सेवा अवधि के दौरान पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू जैसे राज्यों से शस्त्र लाइसेंस बनवाते रहे। रिटायरमेंट के बाद वे इन्हें अपने गृह जिले भिंड में पंजीकृत कराना चाहते हैं, लेकिन महीनों और सालों से आवेदन लंबित पड़े हैं। कई मामलों में हथियार प्रशासनिक अनुमति के बिना घरों में रखे हुए हैं, जो नियमों के तहत अवैध माने जाते हैं।

केस-1: एनओसी के बाद भी अटका पंजीयन


सेना से सेवानिवृत्त मुन्नालाल जोशी ने बताया कि उन्होंने 2010 में सेवा के दौरान जम्मू से शस्त्र लाइसेंस बनवाया था और उसी आधार पर बैंक में सुरक्षा कर्मी की नौकरी भी की। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने जम्मू से एनओसी लेकर भिंड में जमा की, लेकिन इसके बावजूद उनका लाइसेंस यहां दर्ज नहीं हो सका। नतीजतन, उन्हें नवीनीकरण के लिए बार-बार जम्मू जाना पड़ रहा है।

केस-2: अमृतसर–चंडीगढ़ के चक्कर लगाने पड़े


रिटायर्ड फौजी बसंत सिंह राजावत ने बताया कि 1995 में अमृतसर से बने उनके लाइसेंस को भिंड में दर्ज कराने के लिए उन्हें अमृतसर और चंडीगढ़ से एनओसी लानी पड़ी। कई दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद ही उनका लाइसेंस यहां दर्ज हो सका।

संगठनों ने उठाई आवाज


इंडियन वेटर ऑर्गेनाइजेशन के जिला संयोजक सुनील शर्मा ने बताया कि जिले में करीब ढाई हजार से ज्यादा ऐसे शस्त्र लाइसेंस हैं, जो फौजियों ने अपनी सेवा अवधि में अन्य राज्यों से बनवाए थे। ट्रांसफर के लिए आवेदन के बावजूद प्रशासनिक सहयोग नहीं मिल पा रहा है।

पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष राकेश सिंह कुशवाह ने कहा कि वे इस मुद्दे पर कई बार कलेक्टर से मिल चुके हैं और जल्द फिर मुलाकात करेंगे। उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो रिटायर्ड फौजियों की परेशानी और बढ़ेगी। भिंड में शस्त्र लाइसेंस का यह संकट न सिर्फ फौजियों के लिए बल्कि कानून व्यवस्था के लिहाज से भी चिंता का विषय बनता जा रहा है।

साभार… 

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