437 कारोबारियों पर कार्रवाई, 400.92 करोड़ की टैक्स चोरी उजागर
GST: मध्य प्रदेश में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में जीएसटी कलेक्शन में 0.75% की कमी दर्ज की गई है। सरकार ने विधानसभा के हालिया बजट सत्र में जानकारी देते हुए बताया कि इसकी मुख्य वजह सितंबर 2025 में केंद्र सरकार द्वारा किए गए जीएसटी स्लैब बदलाव हैं।
सरकार के जवाब के मुताबिक, इस वित्तीय वर्ष में प्रदेशभर में 437 व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 400.92 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी पकड़ी गई है। इनमें से अब तक 234.49 करोड़ रुपए जमा कराए जा चुके हैं।
कार्रवाई जीएसटी अधिनियम की धारा 67 के तहत इंस्पेक्शन, सर्च और जब्ती के माध्यम से की गई।
स्टील, सुपारी और गुटखा सेक्टर में 129.51 करोड़ की चोरी
आयरन, स्टील, सुपारी और गुटखा से जुड़े 127 मामलों में 129.51 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी सामने आई। इनमें से संबंधित फर्मों ने 46.97 करोड़ रुपए जमा कराए हैं।
बड़े मामलों (50 लाख से अधिक) में कुल 54 करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी उजागर हुई, लेकिन सिर्फ एक मामले में ही राशि सरेंडर की गई।
- कटनी की पीएस ट्रेडर फर्म ने 56 लाख रुपए सरेंडर किए।
- भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में बड़े मामलों में अभी तक कोई सरेंडर नहीं हुआ।
टैक्स चोरी में भोपाल आगे, इंदौर पीछे
प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी माने जाने वाले इंदौर से ज्यादा बड़ी टैक्स चोरी के मामलों में इस बार भोपाल आगे निकल गया है।
- भोपाल: 21 मामलों में 12,394 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी
- इंदौर: 56 मामलों में 10,699 करोड़ रुपए
इसके अलावा 32 जिलों में 140 मामलों में अब तक 339 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी पकड़ी गई, जिसमें से 159 करोड़ रुपए जमा हो चुके हैं।
सितंबर 2025 में बदला था जीएसटी ढांचा
22 सितंबर 2025 से केंद्र सरकार ने जीएसटी ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए चार की जगह दो प्रमुख स्लैब कर दिए थे।
- 12% और 28% स्लैब समाप्त
- विलासिता और सिन गुड्स पर 40% का नया स्लैब लागू
इस बदलाव का असर ऑटोमोबाइल, एसी, फ्रिज जैसे उत्पादों पर पड़ा। कर सलाहकारों के मुताबिक, जीएसटी में कमी का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाया, जिससे खपत में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई।
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