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Holika: महाकालेश्वर मंदिर में सबसे पहले जलेगी होलिका

महाकालेश्वर मंदिर में सबसे पहले

प्रतीकात्मक रूप से अर्पित होगा एक किलो हर्बल गुलाल, सुरक्षा के बीच संपन्न होगा आयोजन

Holika: देश में होली का शुभारंभ सोमवार को सबसे पहले उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में होगा। परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को इस वर्ष भी केवल एक किलो हर्बल गुलाल प्रतीकात्मक रूप से अर्पित किया जाएगा। संध्या आरती के दौरान पुजारी भगवान को गुलाल अर्पित करेंगे, जिसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर परिसर में गोबर के उपलों से बनी होलिका का दहन किया जाएगा।

🔒 सुरक्षा के विशेष इंतजाम

पूर्व में हुई आग की घटना को ध्यान में रखते हुए इस बार भी आम श्रद्धालुओं को होलिका दहन स्थल के पास जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से यह निर्णय लिया है। होलिका दहन के अवसर पर संभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

🌼 धुलेंडी पर विशेष शृंगार और भस्म आरती

मंगलवार को धुलेंडी का पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाएगा। तड़के सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आरती में सबसे पहले भगवान महाकाल को गुलाल लगाया जाएगा। इसके बाद भांग और चंदन से भगवान का विशेष शृंगार किया जाएगा। मंदिर के पुजारी आशीष शर्मा के अनुसार, महाकाल मंदिर में सबसे पहले होली मनाने की यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जिसमें भगवान को प्रतीकात्मक रूप से गुलाल अर्पित किया जाता है।

⏰ आरती के समय में बदलाव

महाकाल मंदिर में वर्ष में दो बार भगवान की दिनचर्या में परिवर्तन होता है।

  • कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से सर्दी के अनुसार आरती का समय तय होता है।
  • चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार आरती का समय निर्धारित किया जाता है।

इस बार 3 मार्च (होली के दूसरे दिन) से भगवान महाकाल की दिनचर्या में बदलाव आएगा।
इस दिन से गर्मी की शुरुआत मानी जाती है और भगवान को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। यह क्रम शरद पूर्णिमा तक जारी रहेगा।

प्रतिदिन होने वाली पांच आरतियों में से तीन आरतियों के समय में भी परिवर्तन किया जाएगा।

🌑 ग्रहण के दौरान विशेष नियम

ग्रहण के सूतक काल में मंदिर के पट खुले रहेंगे, लेकिन नियमित भोग नहीं लगाया जाएगा।
इस दौरान भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया जाएगा। ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिर की शुद्धि कर पूजा-अर्चना और आरती संपन्न की जाएगी।

🚫 रंग लाने पर सख्त प्रतिबंध

  • श्रद्धालुओं को रंग-गुलाल लेकर प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
  • पुजारी, कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी भी रंग लेकर प्रवेश नहीं करेंगे।
  • सभी प्रवेश द्वारों पर कड़ी जांच की जाएगी।
  • मंदिर परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जाएगी।

मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे होली का पर्व मंदिर की गरिमा के अनुरूप शांति, श्रद्धा और सौहार्द के साथ मनाएं।

साभार….

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