मिडिल ईस्ट तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिली कुछ राहत
Decline:नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली के कारण भारतीय रुपये पर दबाव बना हुआ है। बुधवार सुबह के कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4 पैसे कमजोर होकर 91.89 के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि डॉलर की कमजोरी और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण रुपये में तेज गिरावट को कुछ हद तक थामने में मदद मिली है।
क्यों कमजोर हुआ रुपया
Finrex Treasury Advisors LLP के हेड ऑफ ट्रेजरी और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली के अनुसार मंगलवार को रुपया गिरकर 92.12 के स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बॉन्ड जारी होने और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से 92 के स्तर के आसपास डॉलर की बिक्री किए जाने से रुपये में फिर मजबूती देखने को मिली। उन्होंने बताया कि रुपये की लगातार गिरावट से आरबीआई भी असहज था और वह नहीं चाहता था कि रुपया 92.00 के स्तर से और नीचे जाए।
इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में हल्की गिरावट
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 91.92 प्रति डॉलर पर खुला और बाद में 91.89 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले बंद स्तर से 4 पैसे की गिरावट दर्शाता है। मंगलवार को रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर से उबरते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 36 पैसे मजबूत होकर 91.85 पर बंद हुआ था।
तेल की कीमतों में गिरावट से राहत
इस बीच छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स 0.04 प्रतिशत गिरकर 98.78 पर आ गया। घरेलू शेयर बाजार में भी हल्की कमजोरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 96.12 अंक गिरकर 78,109.86 पर आ गया, जबकि निफ्टी-50 22.95 अंक फिसलकर 24,238.65 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.38 प्रतिशत गिरकर 87.47 डॉलर प्रति बैरल रही, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिली है। वहीं शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को 4,672.64 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की।
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