कच्चे माल और परिवहन लागत में भारी बढ़ोतरी, दवा कंपनियों ने सरकार से सब्सिडी और मूल्य नियंत्रण में राहत की अपील
Pharmaceutical industry: इंदौर। मध्यपूर्व में जारी युद्ध का असर अब दवा उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। बढ़ती लागत को देखते हुए दवा उद्योग ने सरकार से दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की अनुमति देने की मांग की है। वर्तमान में दवाओं की कीमतों को National Pharmaceutical Pricing Authority नियंत्रित करता है, लेकिन उद्योग जगत का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में मूल्य नियंत्रण में कुछ राहत देना जरूरी हो गया है। दवा निर्माताओं ने सरकार से कच्चे माल के आयात-निर्यात पर सब्सिडी देने और बढ़ती लागत को संतुलित करने के लिए विशेष सहायता की भी मांग की है। उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि मध्यपूर्व के संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, शिपिंग में देरी और परिवहन लागत बढ़ने से दवा उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है।
कच्चे माल और परिवहन लागत में उछाल
Indian Drug Manufacturers’ Association के उपाध्यक्ष Ajay Singh Dasundi ने बताया कि पेट्रोकेमिकल्स से बनने वाले फार्मास्यूटिकल सॉल्वेंट्स दवा निर्माण में उपयोग किए जाते हैं और इनके दाम एक सप्ताह में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
कुछ कच्चे माल की कीमतों में तो 60 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। उदाहरण के तौर पर ग्लिसरीन की कीमत दिसंबर से अब तक लगभग 64 प्रतिशत तक बढ़ गई है, जबकि पैरासिटामोल के दाम करीब 26 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। इसके अलावा कंटेनरों की कमी, शिपिंग में देरी और बढ़े हुए फ्रेट चार्ज भी दवा कंपनियों की लागत बढ़ा रहे हैं।
इन्वेंटरी संकट की आशंका
दवा कंपनियां आमतौर पर “जस्ट-इन-टाइम” इन्वेंटरी सिस्टम पर काम करती हैं, जिसके कारण उनके पास तैयार दवाओं का बहुत ज्यादा स्टॉक नहीं होता। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार यदि युद्ध की स्थिति अगले 10 से 15 दिनों तक बनी रही तो आवश्यक दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
भारत से दवाओं का निर्यात कई देशों में होता है। विशेष रूप से United Arab Emirates, Saudi Arabia और Oman जैसे देश सस्ती दवाइयों के लिए भारत पर काफी हद तक निर्भर हैं। ऐसे में इस संकट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ सकता है।
उत्पादन लागत बढ़ी, सब्सिडी की मांग
फार्मा उद्योग के अनुसार एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (API), फार्मास्यूटिकल सॉल्वेंट्स और पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में 30 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे उत्पादन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए उद्योग जगत ने सरकार से मांग की है कि एमएसएमई श्रेणी के फार्मा निर्यातकों को बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत को संतुलित करने के लिए फ्रेट (परिवहन) सब्सिडी दी जाए, ताकि दवाओं की आपूर्ति और उत्पादन प्रभावित न हो।
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