नींद में रुकावट से बढ़ सकता है ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का खतरा
Health Desk: स्वास्थ्य डेस्क : अगर आपकी नींद पूरी नहीं होती या बार-बार टूटती है, तो इसका सीधा असर आपके स्वास्थ्य पर पड़ता है। सोते समय खर्राटे लेना एक आम समस्या मानी जाती है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसे नजरअंदाज करना कई बार खतरनाक हो सकता है।
कैसे आते हैं खर्राटे?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि जब सोते समय नाक या गले से हवा का प्रवाह सही तरीके से नहीं हो पाता, तब खर्राटों की आवाज उत्पन्न होती है। हवा जब संकरे रास्ते से गुजरती है, तो आसपास के ऊतक कंपन करने लगते हैं और आवाज पैदा होती है।
- नाक, गले या मुंह में रुकावट
- टॉन्सिल, एडिनॉइड्स या जीभ में सूजन
- गले की मांसपेशियों का ढीलापन (उम्र के साथ)
- नाक की हड्डी का टेढ़ा होना
ये सभी कारण खर्राटों की समस्या को बढ़ा सकते हैं।
कब बन जाता है गंभीर खतरा?
कभी-कभी खर्राटे आना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहे तो यह गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है, जैसे कि स्लीप एपनिया।
इस स्थिति में:
- नींद के दौरान बार-बार सांस रुकती है
- शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है
- दिनभर थकान, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन रहता है
- ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है
किन बीमारियों का बढ़ता है खतरा?
लगातार खर्राटे लेने से
- उच्च रक्तचाप
- टाइप 2 डायबिटीज
जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।
किन कारणों से बढ़ती है समस्या?
विशेषज्ञों के अनुसार जीवनशैली भी इसमें अहम भूमिका निभाती है:
- शराब का सेवन
- नींद की दवाइयों का उपयोग
- मोटापा और गर्दन पर अतिरिक्त चर्बी
- आनुवंशिक कारण
- पुरुषों में अधिक प्रचलन
कैसे पाएं राहत?
खर्राटों से बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं:
- वजन नियंत्रित रखें
- करवट लेकर सोने की आदत डालें
- सोने से पहले शराब से बचें
- नियमित व्यायाम करें
- नेजल स्ट्रिप्स या डॉक्टर द्वारा सुझाए गए उपकरण का उपयोग करें
गंभीर मामलों में डॉक्टर सर्जरी की सलाह भी दे सकते हैं, जैसे लेजर असिस्टेड यूवूलोपलाटोप्लास्टी या टॉन्सिल से जुड़ी प्रक्रियाएं।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
अगर खर्राटे बहुत तेज हों, सांस रुकने जैसा महसूस हो या दिनभर अत्यधिक थकान बनी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर स्लीप स्टडी के जरिए पूरी जांच की जाती है।
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