डॉक्टर्स ने 7 दिन किया दिव्यांग बच्ची का उपचार
Treatment: बैतूल। एक दिव्यांग बच्ची की नाक में संक्रमण से लार्वा (कीड़े) पनप रहे थे। इसका पता चलने पर डॉक्टरों की टीम ने 7 दिनों में बच्ची की नाक से कीड़े निकाले। अब बच्ची की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार, अगर इलाज में और देरी होती, तो संक्रमण दिमाग तक पहुँचकर जानलेवा साबित हो सकता था। फिलहाल बच्ची खतरे से बाहर है। बच्ची पिछले एक महीने से सर्दी-खांसी और बुखार से परेशान थी। धीरे-धीरे नाक से तेज बदबू आने लगी। वह लगातार सुस्त रहने लगी थी। निजी अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने नाक के अंदर जीवित लार्वा देखा। इसके बाद बच्ची को तुरंत जिला अस्पताल रेफर किया गया।
जिला अस्पताल में डॉक्टर ऋ षि माहोर ने एंडोस्कोपिक तकनीक से इलाज किया। उन्होंने बताया कि 5 से 7 दिन तक लगातार प्रक्रिया चली। हर दिन नाक से 5 से 10 लार्वा निकाले गए। नाक के अंदर पहले से काफी नुकसान हो चुका था। डॉक्टर के अनुसार, संक्रमण तेजी से फैल रहा था, लेकिन समय रहते इसे नियंत्रित किया गया। परिजनों ने बताया कि शुरुआत में बच्ची की बीमारी सामान्य सर्दी-खांसी लग रही थी। धीरे-धीरे नाक से तेज बदबू आने लगी। बच्ची बोल नहीं पा रही थी, इसलिए दर्द व्यक्त नहीं कर सकी। हालत बिगडऩे पर परिजन उसे अस्पताल ले गए, जहां असली कारण का पता चला।
इनका कहना…
पूरा इलाज एंडोस्कोपिक तकनीक से किया गया, जिसमें बिना बड़ा चीरा लगाए नाक के अंदर से सर्जरी होती है। उन्होंने चेतावनी दी कि नाक से बदबू, खून, मवाद या कोई असामान्य लक्षण महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज ही ऐसे गंभीर संक्रमण से बचा सकता है।
डॉक्टर ऋ षि माहोर, मेडिकल ऑफिसर, बैतूल
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