Costly: इस बार सरसों का तेल रसोई का बजट बिगाड़ सकता है। इसकी वजह किसी अंतरराष्ट्रीय तनाव जैसे ईरान–अमेरिका विवाद नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर सरसों का कम उत्पादन और ऊंचे दाम हैं।
मंडी में सरसों एमएसपी (₹6200 प्रति क्विंटल) से ज्यादा, यानी ₹6800 से ₹7000 प्रति क्विंटल तक बिक रही है।
🌾 40% तक गिरा उत्पादन, मौसम बना वजह
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र, जिसे सरसों की “पीले सोने की खान” कहा जाता है, इस बार उत्पादन में भारी गिरावट का सामना कर रहा है।
👉 मुख्य कारण:
- लंबे समय तक सक्रिय मानसून (कम बुवाई)
- फसल में पाला (रोग) लगना
- कटाई के समय बारिश
इन कारणों से उत्पादन करीब 40% तक घट गया, जिससे मंडियों में आवक भी कम हो गई।
📈 एमएसपी से ऊपर बिक रही सरसों
सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹6200 है, लेकिन मंडियों में भाव इससे ₹600–₹800 ज्यादा चल रहा है।
👉 इसका असर:
- किसानों को फायदा
- उपभोक्ताओं को महंगा तेल
🛢️ सरसों तेल 170 रुपये किलो तक जा सकता है
फिलहाल बाजार में सरसों तेल:
- ₹150–₹160 प्रति किलो
👉 आने वाले समय में संभावित कीमत:
- ₹160–₹170 प्रति किलो
कारोबारियों के अनुसार, यदि आवक कम रही तो कीमत और बढ़ सकती है।
🏭 इकाइयों पर संकट, रोजगार पर असर
मुरैना सहित ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में कई मस्टर्ड ऑयल यूनिट्स संचालित हैं।
- पहले से ही कई इकाइयां कच्चे माल की कमी से बंद हैं
- इस बार भी सरसों की कमी रही तो और यूनिट्स प्रभावित हो सकती हैं
- इससे रोजगार पर भी संकट बढ़ेगा
📊 भावांतर योजना की नहीं पड़ी जरूरत
सरकार ने सरसों को भावांतर योजना में शामिल किया था, ताकि MSP से कम दाम मिलने पर किसानों को नुकसान न हो।
👉 लेकिन इस बार:
- मंडी में दाम MSP से ज्यादा
- इसलिए किसानों को योजना की जरूरत ही नहीं पड़ी
👨🌾 किसानों को फायदा, आम जनता पर बोझ
कृषि विभाग के अनुसार, इस बार किसानों को उनकी फसल का सीधा फायदा मिल रहा है।
लेकिन दूसरी ओर, आम उपभोक्ताओं के लिए महंगा सरसों तेल खरीदना मजबूरी बन सकता है।
साभार…
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