अडानी समूह की खदानों में शुरू होगा गैस उत्पादन, ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम
Approval: भोपाल। मध्य प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने राज्य की दो प्रमुख कोयला खदानों को कोयला खनन के साथ-साथ गैस निर्माण की अनुमति दे दी है। इससे प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन के नए विकल्प खुलेंगे और गैस आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।
⛏️ सिंगरौली की खदानों में होगा नया प्रयोग
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सिंगरौली क्षेत्र की महान और गोंडबहेरा उज्जैनी पूर्व कोयला खदानें Adani Group के स्वामित्व में हैं।
इन खदानों में अगले दो वर्षों के भीतर उत्खनन और गैस उत्पादन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
🔥 कोयले से बनेगी रसोई गैस
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यह पहली बार होगा जब कोयला कंपनियां खुद कोयले से गैस (Coal गैसीफिकेशन) तैयार करेंगी।
- इसके लिए कंपनियों को अलग से गैस निर्माण संयंत्र लगाने होंगे
- तय तापमान पर कोयले को प्रोसेस कर गैस बनाई जाएगी
- इस गैस का उपयोग रसोई गैस (LPG जैसे विकल्प) के रूप में किया जा सकेगा
इस पहल से भविष्य में गैस की उपलब्धता आसान और सस्ती होने की संभावना है।
⚡ बिजली संयंत्रों को भी मिलेगा फायदा
प्रदेश में उत्पादित कोयला पहले से ही कई बड़े बिजली संयंत्रों को सप्लाई किया जाता है—
- बिरसिंहपुर, अमरकंटक, सारणी और खंडवा के राज्य बिजली केंद्र
- सिंगरौली, गाडरवारा और खरगोन के केंद्रीय विद्युत केंद्र
- सासन, बीना और एनबी पावर प्लांट जैसे बड़े औद्योगिक संयंत्र
नई गैस तकनीक से इन संयंत्रों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत भी मिल सकता है।
🌍 शहडोल में पहले से चल रही गैस परियोजना
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शहडोल क्षेत्र में Reliance Industries द्वारा कोल बेड मीथेन (CBM) परियोजना संचालित की जा रही है।
- लगभग 997 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली परियोजना
- करीब 300 कुओं से प्राकृतिक गैस उत्पादन
- देश की प्रमुख अपारंपरिक ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल
📊 प्रदेश की ऊर्जा स्थिति (फैक्ट फाइल)
- 🔹 कुल 55 कोयला खदानों में उत्पादन जारी
- 🔹 24 मिलियन टन कोयला उपलब्धता
- 🔹 प्रतिदिन 16–17 हजार मेगावाट बिजली खपत
🔍 क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
- ✔ ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी
- ✔ गैस आपूर्ति और वितरण होगा आसान
- ✔ कोयले का मल्टी-यूज (बहुउद्देश्यीय उपयोग) संभव होगा
- ✔ भविष्य में आयातित गैस पर निर्भरता घट सकती है
- साभार…
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