विधानसभा में सामने आए आंकड़े, हजारों गिरफ्तार लेकिन सजा सिर्फ 6 मामलों में
Big revelation: राजधानी भोपाल में मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश आंकड़ों ने साइबर अपराध की भयावह तस्वीर उजागर कर दी है। मोबाइल हैकिंग, ओटीपी फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और डीपफेक जैसी तकनीकों के जरिए साइबर अपराधी लोगों की गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं।
कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि वर्ष 2020 से 2025 तक प्रदेश में साइबर अपराधियों ने 323.99 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। यदि 2026 को भी शामिल किया जाए तो अब तक कुल 4454 साइबर अपराध दर्ज हो चुके हैं।
ऑनलाइन बैंकिंग से जुड़े मामलों में कुल 329.98 करोड़ रुपये की ठगी हुई है। इन मामलों में प्रदेश के 3250 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य राज्यों के 1153 आरोपियों और 11 विदेशी आरोपियों को भी पकड़ा गया है।
साल दर साल बढ़ती ऑनलाइन ठगी
2020: 344 वारदातें, 15.94 करोड़ की ठगी।
104 स्थानीय और 63 अन्य राज्यों के आरोपी गिरफ्तार।
2021: 346 वारदातें, 35 करोड़ की ठगी।
116 स्थानीय और 140 अन्य राज्यों के आरोपी गिरफ्तार।
2022: 337 वारदातें, 17.97 करोड़ की ठगी।
70 स्थानीय और 184 अन्य राज्यों के आरोपी गिरफ्तार।
2023: 335 वारदातें, 54.51 करोड़ की ठगी।
140 स्थानीय और 191 अन्य राज्यों के आरोपी गिरफ्तार।
2024: 505 वारदातें, 108.81 करोड़ की ठगी (सबसे अधिक)।
213 स्थानीय और 154 अन्य राज्यों के आरोपी गिरफ्तार।
2025: 404 वारदातें, 91.76 करोड़ की ठगी।
2016 स्थानीय और 147 अन्य राज्यों के आरोपी गिरफ्तार।
2026 (अब तक): 34 वारदातें, 5.91 करोड़ की ठगी।
14 स्थानीय और 2 अन्य राज्यों के आरोपी गिरफ्तार।
रिकवरी में नाकामी
सरकार ने विधानसभा में बताया कि 2020 से अब तक 329.98 करोड़ रुपये की ठगी में से केवल 64.78 करोड़ रुपये की राशि जब्त की जा सकी है।
चौंकाने वाली बात यह है कि जब्त रकम में से पीड़ितों को सिर्फ 29.26 लाख रुपये ही वापस किए जा सके हैं। यानी ठगी गई कुल राशि का एक प्रतिशत भी वापस नहीं हो पाया है।
महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध
2020 से अब तक महिलाओं से जुड़े साइबर अपराधों की 265 शिकायतें साइबर सेल को मिली हैं। इन मामलों में 248 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन केवल 6 मामलों में ही सजा हो सकी है।
बढ़ती चुनौती
आंकड़े बताते हैं कि गिरफ्तारी के बावजूद सजा दर बेहद कम है और ठगी गई रकम की रिकवरी भी न्यूनतम है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराध से निपटने के लिए तकनीकी क्षमता, डिजिटल साक्षरता और कानूनी प्रक्रियाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है। प्रदेश में तेजी से बढ़ते डिजिटल लेनदेन के बीच साइबर सुरक्षा अब कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौती बन चुकी है।
साभार…
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