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Blame: परिजनों का आरोप: उपचार में लापरवाही , युवक की हालत गंभीर

उपचार में लापरवाही

डॉक्टर बोले हर जहर में नली नहीं डाली जाती

Blame: बैतूल।बैतूल। एक युवक ने जहर खा लिया था। परिजनों को पता चला तो उसे प्रभात पट्टन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। यहां पर डॉक्टरों द्वारा जहर निकालने के लिए नाल में नली डालने के बजाए सिर्फ एक इंजेक्शन और बोतल लगाकर रेफर कर दिया। जबकि पर्चे में बकायदा जहर निकालने का उल्लेख किया गया था। परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे तो बताया गया कि जहर निकालने का प्रयास ही नहीं किया गया। फिलहाल मरीज की हालत गंभीर बनी हुई है। उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया है। प्रभातपट्टन बीएमओ ने कहा कि हर जहर में नली नहीं डाली जाती है, मरीज का गाईड लाईन के अनुसार उपचार किया गया उसके बाद उसे रेफर किया गया।


परिजनों ने लगाए आरोप


प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम जलमोह निवासी 22 वर्षीय माधव पिता किसन उइके ने रविवार रात करीब साढ़े आठ बजे कीटनाशक का सेवन कर लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे तुरंत प्रभातपट्टन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। लेकिन आरोप है कि यहां डॉक्टरों ने ज़हर निकालने के लिए नाक से नली डालने जैसी जरूरी प्रक्रिया नहीं की। केवल इंजेक्शन और बोतल चढ़ाकर युवक को बैतूल जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। सोमवार देर रात करीब 1 बजकर 33 मिनट पर युवक को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है और फिलहाल उसे आईसीयू में रखा गया है।


पर्चे में कर दिया जहर निकालने का उल्लेख


हैरानी की बात यह है कि प्रभातपट्टन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रेफर पर्चे में बेकवास यानी ज़हर निकालने की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है, जबकि परिजनों का साफ कहना है कि मरीज की नाक में कोई नली नहीं डाली गई। यह सवाल खड़े करता है कि आखिर कागजों में इलाज और हकीकत में इलाज में इतना बड़ा फर्क क्यों? परिजनों का आरोप है कि अगर समय रहते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सही उपचार किया जाता और उसके बाद रेफर किया जाता, तो युवक की जान आज इस कदर खतरे में नहीं होती।


गंभीर बनी हुई है हालत


यह कोई पहला मामला नहीं है। बैतूल जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से लगातार लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। फिलहाल युवक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है और बड़ा सवाल यही है—क्या सिस्टम की इस लापरवाही का जवाब कोई देगा?


इनका कहना…
हर एक पाईजन में नली नहीं डाली जाती है, जैसे सल्फास, एसिड में नली डालना घातक हो जाता है। इस मरीज को गाईड लाईन के अनुसार उपचार देकर रेफर किया गया था, इसने सल्फास खाया था।
डॉ. संदीप धुर्वे, बीएमओ प्रभातपट्टन

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