बिना अनुमति, बिना मापदण्ड बनाए सीमेंट के ब्रेकर

Breaker: बैतूल। पिछले कुछ समय से बैतूल शहर में मुख्य मार्ग और गलियों में गति अवरोधक (ब्रेकर) बनाए और लगाए जाने की होड़ लग गई है। इसमें भी रोचक यह है कि इन ब्रेकर्स को लगाने के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता वाली यातायात समिति की अनुमति है और ना ही कुछ मामलों में नगर पालिका परिषद की स्वीकृति ली गई है। कई जगह तो ब्रेकर लगने के बाद शिकायत होने के बाद नपा के अधिकारियों और जिम्मेदार पदाधिकारियों को जानकारी मिलती है कि ब्रेकर लग गए हैं।

गंज और कालेज रोड पर सीमेंट के बने ब्रेकर
कुछ दिनों पूर्व एसपी ऑफिस से गंज जाने वाले मार्ग पर शासकीय कन्या शाला और जेएच कालेज के ठीक सामने दोनों तरफ के मार्ग पर चार गति अवरोधक बनाकर लगाए गए हैं। सीमेंट के इन ब्रेकर्स की ऊंचाई इतनी अधिक है कि दो पहिया वाहन चालक तो गिर रहे हैं और कई मामलों में चौपहिया वाहन चालक ब्रेकर पर गाड़ी धीमी करते हैं तो पीछे से दोपहिया वाहन चालक गाड़ी को ठोक रहे हैं, और दिन भर में एक या दो मामले ऐसे हो रहे हैं।
दुर्घटना में कई गंभीर रूप से हुए घायल
इन स्पीड ब्रेकर के सामने कुछ दिनों के अंतराल में कई दुर्घटनाएं ऐसी घटी जिनमें दोपहिया वाहन चालक तो गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें शहर के वरिष्ठ पत्रकार भी शामिल हैं जो लंबे समय तक चिकित्सालय में उपचार कराते रहे। एक पत्रकार की चौपहिया वाहन पर पीछे से मोटर साइकिल चालक ने स्पीड ब्रेकर पर टक्कर मारी और कार की डिक्की में घुस गया। इस तरह की घटनाएं रोज हो रही है लेकिन ना कोई बोलने वाला है और ना कोई देखने वाला है। अंधेर नगरी और चौपट राजा की तर्ज पर काम चल रहा है।

गति अवरोधकों के सामने नहीं है बोर्ड
इन दोनों सडक़ों पर सीमेंट के बनाए गए गति अवरोधकों के स्थान के पहले ना तो व्हाइट पेंट से संकेतक लगाए गए हैं और ना ही गति अवरोधकों के बोर्ड लगे हैं। जबकि नियमानुसार जिला यातायात समिति से लिखित अनुमति लेने के बाद गति अवरोधक बनाए जा सकते हैं। इस समिति के प्रमुख कलेक्टर एवं अन्य सदस्यों में एसपी सीएमओ नपा, पीडब्ल्यूडी ईई, यातायात प्रभारी एवं अन्य अधिकारी शामिल रहते हैं। गति अवरोधकों के निर्माण के लिए निश्चित मापदण्ड और साइज भी है। इन गति अवरोधकों को बनाने से पहले इन मापदण्डों का भी ध्यान नहीं रखा गया है।

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