नए अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में असम से बंगाल तक चुनावी टीमों का गठन, 2026 चुनाव होंगे पहली बड़ी परीक्षा
Changes: नई दिल्ली। भाजपा (BJP) के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के कार्यभार संभालने के बाद पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र, पार्टी ने देशभर से चुने गए नेताओं को राज्य-विशेष जिम्मेदारियों के साथ मैदान में उतारने की रणनीति बनाई है। इन राज्यों में नेताओं के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें नई राष्ट्रीय टीम में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है।
असम के लिए बनी विशेष टीम
भाजपा ने असम के लिए लगभग एक दर्जन राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की सूची तैयार की है। इस टीम का मार्गदर्शन चुनाव प्रभारी बैजयंत ‘जय’ पांडा कर रहे हैं। टीम में दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज, प्रवेश वर्मा, विधायक अनिल शर्मा, पवन शर्मा, राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश और राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर जैसे नाम शामिल हैं। यह टीम राज्य में भाजपा, आरएसएस और राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच सेतु के रूप में काम करेगी।
जमीनी जिम्मेदारियां
इन नेताओं को केवल प्रचार नहीं, बल्कि लोकसभा क्षेत्रों के भीतर चुनावी प्रबंधन, जनसांख्यिकीय विश्लेषण, बूथ-स्तरीय रणनीति और टिकट वितरण पर फीडबैक जैसी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। चुनाव नज़दीक आने पर वे मतदाता संपर्क और पार्टी छवि को मजबूत करने पर भी काम करेंगे।
चयन के मानदंड
टीम चयन में आरएसएस पृष्ठभूमि, ABVP और युवा मोर्चा से जुड़े अनुभव को प्राथमिकता दी गई है। उद्देश्य नए अध्यक्ष के तहत “संगठनात्मक निरंतरता” बनाए रखना बताया जा रहा है। चुनाव के बाद प्रदर्शन-आधारित मूल्यांकन के जरिए नई राष्ट्रीय टीम में भूमिकाएं तय होने की संभावना है।
पीढ़ीगत बदलाव के संकेत
45 वर्षीय नितिन नवीन की नियुक्ति को पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। चर्चा है कि उनकी टीम में नए चेहरे और अनुभवी नेता—दोनों का संतुलन रहेगा। कई वरिष्ठ नेताओं के राज्यसभा से रिटायरमेंट और एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल के मध्य-चरण के साथ कैबिनेट फेरबदल की अटकलें भी हैं।
असम और बंगाल: पहली बड़ी परीक्षा
2026 के असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नितिन नवीन के लिए नेतृत्व की पहली बड़ी कसौटी होंगे।
- असम में भाजपा लगातार तीसरी जीत (हैट्रिक) के लक्ष्य के साथ उतर रही है। पार्टी बूथों की संख्या 28,000 से बढ़ाकर 31,400 करने और माइक्रो-मैनेजमेंट पर जोर दे रही है।
- पश्चिम बंगाल में चुनौती अधिक है, जहां पार्टी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और विकास मॉडल पर भरोसा कर रही है। राज्य को जोन-आधारित वॉर-रूम में बांटकर राष्ट्रीय नेताओं की तैनाती की गई है। भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण और कानून-व्यवस्था प्रमुख मुद्दे बताए जा रहे हैं।
नितिन नवीन ने पद संभालते ही बंगाल का दौरा शुरू कर दिया है और दुर्गापुर में कोर-टीम बैठक के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का रोडमैप तैयार किया गया है।
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