वेस्टर्न डिस्टरबेंस के असर से बादल-बारिश की संभावना, उत्तरी एमपी रहेगा ज्यादा प्रभावित
Cold: भोपाल। मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड से फिलहाल थोड़ी राहत मिली है। बीते दो दिनों में न्यूनतम तापमान में करीब 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिन में धूप निकलने से लोगों को कुछ आराम मिला है, लेकिन मौसम विभाग ने जनवरी के आखिरी सप्ताह में एक बार फिर तेज सर्दी लौटने की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी हिमालय क्षेत्र से गुजर रहे सक्रिय सिस्टम के आगे बढ़ने के बाद उत्तर भारत से ठंडी हवाएं चलेंगी, जिससे प्रदेश में तापमान में फिर गिरावट आएगी।
प्रदेश के ऊपर सक्रिय हैं दो मौसम तंत्र
वर्तमान में मध्य प्रदेश के ऊपर वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं। इसी कारण कई जिलों में बादल छाए हुए हैं।
21 जनवरी को एक स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर 23 जनवरी के बाद मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में देखने को मिल सकता है।
इन संभागों में बादल और हल्की बारिश के आसार
इस सिस्टम के प्रभाव से ग्वालियर, चंबल, रीवा और सागर संभाग में बादल छाने और हल्की बारिश की संभावना है।
सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, अगले चार दिनों तक कोई अलर्ट नहीं है, लेकिन आने वाला वेस्टर्न डिस्टरबेंस तीव्र हो सकता है। स्थिति अगले दो-तीन दिनों में स्पष्ट हो जाएगी।
क्या होता है वेस्टर्न डिस्टरबेंस?
मौसम विभाग के मुताबिक, वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिम दिशा से आने वाला हवा और बादलों का सिस्टम होता है। इसके सक्रिय होने पर पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश होती है।
जब यह सिस्टम आगे बढ़ जाता है, तब उत्तर से ठंडी हवाएं चलती हैं, जिससे दिन और रात—दोनों समय ठंड का असर बढ़ जाता है।
कटनी का करौंदी सबसे ठंडा, इंदौर बड़े शहरों में अव्वल
रविवार-सोमवार की रात प्रदेश में सबसे ठंडा स्थान कटनी का करौंदी रहा, जहां न्यूनतम तापमान 7.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
प्रमुख शहरों का न्यूनतम तापमान
- इंदौर: 8.2°C
- भोपाल: 10.6°C
- ग्वालियर: 10.8°C
- उज्जैन: 10°C
- जबलपुर: 13.8°C
अन्य स्थान
- शहडोल (कल्याणपुर): 7.7°C
- खजुराहो: 8°C
- मंडला, राजगढ़: 8.4°C
- दतिया: 9°C
- पचमढ़ी: 9.8°C
जनवरी क्यों होती है ठंड के लिए खास?
मौसम विभाग के अनुसार, जैसे मानसून में जुलाई-अगस्त सबसे अहम होते हैं, वैसे ही दिसंबर और जनवरी कड़ाके की ठंड के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
इन महीनों में उत्तर भारत से आने वाली सर्द हवाएं ज्यादा सक्रिय रहती हैं। पिछले 10 वर्षों के आंकड़े भी यही ट्रेंड दर्शाते हैं। जनवरी में वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण मावठा गिरने की संभावना भी बनी रहती है।
भोपाल और इंदौर के ऐतिहासिक तापमान रिकॉर्ड
भोपाल
- न्यूनतम तापमान: 0.6°C (18 जनवरी 1935)
- अधिकतम तापमान: 33°C (26 जनवरी 2009)
- जनवरी में सर्वाधिक 24 घंटे की बारिश: 2 इंच (6 जनवरी 2004)
इंदौर
- न्यूनतम तापमान: -1.1°C (16 जनवरी 1935)
- अधिकतम तापमान: 33.9°C (27 जनवरी 1990)
- 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश: 3 इंच से अधिक (6 जनवरी 1920)
- साभार…
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