175 अवैध स्ट्रक्चर पर लटकी कार्रवाई, नोटिस जारी—अब अगला कदम प्रशासन के हाथ
Commotion: उज्जैन। उज्जैन के सिंहस्थ मेला क्षेत्र में अवैध मठ-आश्रमों और अन्य निर्माणों पर प्रशासन की सख्ती के बाद हड़कंप मच गया है। बुधवार को हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद अब शेष 175 अवैध स्ट्रक्चर के मालिकों में खलबली है। सभी को स्वयं अवैध निर्माण हटाने का नोटिस दिया जा चुका है और अब कार्रवाई का इंतजार है।
बुधवार को नगर निगम और पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीम ने नृसिंहघाट से लालपुल के बीच शंकराचार्य मठ स्वामी पुण्यानंदगिरि, श्री माधवानंद आश्रम सहित पांच प्रमुख धार्मिक एवं सामाजिक स्थलों के अवैध हिस्सों को जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई के बाद चिन्हित अन्य निर्माणकर्ताओं में बेचैनी बढ़ गई है।
180 अवैध निर्माणों की सूची तैयार
प्रशासनिक सर्वे में सिंहस्थ क्षेत्र में कुल 180 अवैध निर्माण चिन्हित किए गए हैं। इनमें से कुछ पर कार्रवाई हो चुकी है, जबकि शेष पर कार्रवाई प्रस्तावित है। जांच में सामने आया है कि पिछले दो दशकों में ‘धार्मिक स्थल’ की आड़ में कई जगह व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। मैरिज गार्डन, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पीछे मंदिर या आश्रम बनाकर उन्हें संरक्षण देने की कोशिश की गई। कलेक्टर कार्यालय से संकेत मिले हैं कि नोटिस अवधि समाप्त होते ही शेष निर्माणों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
अधिकारियों का कहना है कि सिंहस्थ मेला क्षेत्र की पवित्रता और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए भूमि का अतिक्रमण मुक्त होना जरूरी है। वर्षों से जमे निर्माणों को हटाना आसान नहीं है, लेकिन प्रशासन इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की तैयारी में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अभी अतिक्रमण नहीं हटाए गए तो 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ के दौरान अव्यवस्था और सुरक्षा संकट उत्पन्न हो सकता है।
जिम्मेदारी और खर्च वसूली पर सवाल
सिंहस्थ क्षेत्र में पक्का निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित होने के बावजूद सैकड़ों अवैध संरचनाएं खड़ी होना संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है। नियमों के अनुसार अवैध निर्माण हटाने में आने वाला खर्च संबंधित अतिक्रमणकारी से वसूला जाना चाहिए, लेकिन अब तक ऐसी वसूली के स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आए हैं। प्रशासन को अब न केवल अतिक्रमण हटाने, बल्कि हटाने में आए खर्च की वसूली के लिए भी सख्त कदम उठाने होंगे, ताकि सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ न पड़े।
क्यों जरूरी है सिंहस्थ भूमि का संरक्षण?
- बढ़ता जनसैलाब: वर्ष 2016 में लगभग 7 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे, जबकि 2028 में यह संख्या 15 करोड़ पार करने का अनुमान है।
- अखाड़ों और साधु-संतों के पांडाल: बढ़ती संख्या के चलते अधिक भूमि की आवश्यकता।
- सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन: भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन निकासी मार्ग के लिए खाली क्षेत्र अनिवार्य।
- बुनियादी ढांचा: अस्थायी अस्पताल, पुलिस चौकियां, बिजली ग्रिड और पार्किंग व्यवस्था के लिए पर्याप्त भूमि जरूरी।
प्रशासन की मौजूदा सख्ती को उज्जैन के सुरक्षित और सुव्यवस्थित भविष्य की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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