Monday , 30 March 2026
Home Uncategorized Controversy: मध्य प्रदेश में बिजली महंगी: स्मार्ट मीटर की लागत ने बढ़ाया विवाद
Uncategorized

Controversy: मध्य प्रदेश में बिजली महंगी: स्मार्ट मीटर की लागत ने बढ़ाया विवाद

मध्य प्रदेश में बिजली महंगी: स्मार्ट

4.80% दर वृद्धि के साथ उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ

Controversy: मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में 4.80 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दे दी है। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण 2,867 करोड़ रुपये के घाटे की भरपाई बताया गया है, लेकिन इसमें स्मार्ट मीटर से जुड़ी 821 करोड़ रुपये की लागत शामिल होने से नया विवाद खड़ा हो गया है।


स्मार्ट मीटर लागत छिपाने के आरोप

जानकारी के अनुसार, स्मार्ट मीटर की लागत को बिजली बिल में अलग से नहीं दिखाया गया, बल्कि इसे दरों में ही जोड़ दिया गया है।
इस 821 करोड़ रुपये में—

  • 514 करोड़ रुपये लीज किराया
  • 307 करोड़ रुपये संचालन और रखरखाव खर्च

शामिल हैं, जो निजी कंपनियों को भुगतान किए जाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपभोक्ताओं से “छिपे हुए शुल्क” के रूप में वसूली का मामला हो सकता है।


हर यूनिट पर बढ़ा बोझ

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार:

  • यदि स्मार्ट मीटर लागत शामिल नहीं होती, तो दरें करीब 10 पैसे प्रति यूनिट कम हो सकती थीं।
  • प्रदेश में सालाना करीब 8,400 करोड़ यूनिट बिजली खपत होती है।

उदाहरण:

  • 300 यूनिट/माह उपयोग करने वाले घरेलू उपभोक्ता को लगभग 30 रुपये अतिरिक्त देना होगा।
  • 1 लाख यूनिट/माह उपयोग करने वाले उद्योग को करीब 10,000 रुपये अधिक चुकाने पड़ सकते हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि जिन उपभोक्ताओं के यहां अभी स्मार्ट मीटर नहीं लगे हैं, उन्हें भी यह अतिरिक्त भार उठाना पड़ेगा।


ऊर्जा मंत्री के बयान पर सवाल

इस पूरे मुद्दे पर प्रद्युमन सिंह तोमर के पहले दिए गए बयान पर भी सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने 27 फरवरी 2026 को विधानसभा में कहा था कि स्मार्ट मीटर के लिए उपभोक्ताओं से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा रहा है, लेकिन अब दरों में लागत शामिल होने से अप्रत्यक्ष वसूली की स्थिति सामने आई है।


दो चरणों में स्मार्ट मीटर योजना

प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य दो चरणों में किया जा रहा है:

  • पहला चरण: 58.65 लाख मीटर
  • दूसरा चरण: 82.78 लाख मीटर

👉 कुल लक्ष्य: 1.41 करोड़ स्मार्ट मीटर
👉 अभी तक: लगभग 20 लाख मीटर स्थापित
👉 अंतिम समय सीमा: 31 मार्च 2028


विशेषज्ञों की राय

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इस तरह की लागत को पारदर्शी तरीके से अलग दिखाया जाना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी मिल सके। दरों में छिपाकर जोड़ने से भ्रम की स्थिति बनती है और भरोसे पर असर पड़ता है।

साभार…

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

New Discovery: IIT गुवाहाटी की नई खोज: खास ईंटें रखेंगी घर ठंडा, घटेगा बिजली बिल

गर्मी से राहत के लिए सस्ती और पर्यावरण अनुकूल तकनीक तैयार New...

Rescue: फ्रिज के नीचे मिला खतरनाक रसेल वाइपर, सर्पमित्र ने किया सुरक्षित रेस्क्यू

बैतूल की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में मचा हड़कंप, समय रहते टली बड़ी...

Mass Sit-in: महंगाई और बिजली संकट पर कांग्रेस का हल्ला बोल, घोड़ाडोंगरी में महाधरना

भाजपा सरकार पर तीखा हमला, आदिवासी मुद्दों और पेट्रोल-डीजल संकट पर उठे...

Surprise inspection: नगर पालिका कर्मचारियों की लापरवाही पर सीएमओ का डंडा

सुबह 10.30 बजे राजस्व शाखा का किया औचक निरीक्षण, गैरहाजिर कर्मचारी का...