मौतों के डर ने बदला शहर का व्यवहार, पांच गुना बढ़ी मिनरल वाटर की मांग
Crisis: इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 20 मौतों के बाद इंदौर शहर के लोगों में पीने के पानी को लेकर गहरा डर बैठ गया है। हालात ऐसे हैं कि लोग न तो नल का पानी पी रहे हैं और न ही बोरिंग का। मजबूरी में हर दूसरा परिवार अब मिनरल वाटर पर निर्भर हो गया है, जिससे पिछले दस दिनों में इसकी खपत करीब पांच गुना बढ़ गई है।
हर दिन 40 रुपए का पानी, जान बचाने की मजबूरी
भागीरथपुरा निवासी धर्मेंद्र सिंह की आवाज में बेबसी साफ झलकती है। किराए के मकान में पत्नी और दो बच्चों के साथ रहने वाले धर्मेंद्र बताते हैं,
“यहां का पानी जहरीला हो चुका है। रोज 40 रुपए का कैंपर मंगाना पड़ रहा है। उसी से खाना बनता है और वही पीते हैं। खर्च बढ़ गया है, लेकिन बच्चों की जान से बढ़कर कुछ नहीं।” उनके जैसे सैकड़ों परिवार हैं जो रोजाना अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठा रहे हैं, जबकि कई गरीब परिवार पानी उबालकर पीने को मजबूर हैं।
ब्रांडेड और लोकल पैक्ड वाटर पर बढ़ा भरोसा
भागीरथपुरा कांड के बाद पूरे इंदौर में बिसलेरी, किनले और लोकल ब्रांड्स की खपत में 25 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बिसलेरी के डिस्ट्रीब्यूटर रविकांत वर्मा के मुताबिक,
“ऐसे इलाकों से भी डिमांड आ रही है जहां साफ पानी सप्लाई हो रही है, लेकिन लोग रिस्क नहीं लेना चाहते।”
होस्टल में रहने वाले बच्चों को लेकर सबसे ज्यादा चिंता
शहर में पढ़ने आए छात्र और उनके परिजन सबसे ज्यादा डरे हुए हैं। परिजन गूगल पर नंबर खोजकर पानी सप्लायरों से सीधे संपर्क कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पैसे देने को भी तैयार हैं।
आंकड़ों में डर: दिसंबर में 15.60 लाख लीटर पानी की बिक्री
बिसलेरी के एमपी सेल्स हेड हर्षवर्धन सिंह ठाकुर बताते हैं—
- नवंबर: 8.40 लाख लीटर
- दिसंबर: 15.60 लाख लीटर
महज डेढ़-दो हफ्तों में 20–25% की ग्रोथ दर्ज की गई।
आरओ प्लांट की सप्लाई पांच गुना बढ़ी
भागीरथपुरा चौकी के सामने आरओ प्लांट चलाने वाले कमल परमार बताते हैं,
“पहले दिन में 20–25 कैंपर जाते थे, अब 100–125 कैंपर सप्लाई हो रहे हैं। सुबह-शाम गाड़ियां भेजनी पड़ रही हैं।”
होटल, ढाबे और चाय की दुकानें भी अलर्ट
अब डर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है।
- होटल और भोजनालय मिनरल वाटर से खाना बना रहे हैं
- चाय की दुकानों पर बिसलेरी से चाय बनाई जा रही है
- समोसे का मैदा भी फिल्टर पानी से गूंथा जा रहा है
टोपीलाल होटल के संचालक तुषार वर्मा बताते हैं,
“ग्राहक चाय पीने से पहले पूछते हैं—पानी कौन सा है?”
प्रशासनिक दावे और जनता का अविश्वास
प्रशासन ने 40 से अधिक टैंकर लगाए हैं। कलेक्टर ने खुद टैंकर का पानी पीकर भरोसा दिलाने की कोशिश की, लेकिन लगातार हो रही मौतों ने लोगों का विश्वास तोड़ दिया है।
लोग टैंकर के पानी का इस्तेमाल सिर्फ कपड़े धोने और नहाने तक सीमित रखे हुए हैं। पीने और खाना बनाने में वे अब भी डर रहे हैं।
डर और खर्च के बीच पिसता आम आदमी
भागीरथपुरा की गलियों में बहता पानी नहीं, बल्कि भय है—
डर बीमारी का, डर मौत का और डर उस पानी का, जो कभी जीवन था और अब खतरा बन गया है।
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