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Dangerous: वायरल फीवर का बदला पैटर्न बढ़ा रहा चिंता, 2–3 दिन की राहत के बाद ज्यादा गंभीर रूप में लौट रहा बुखार

वायरल फीवर

Dangerous:भोपाल। इस बार वायरल फीवर का पैटर्न पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक और परेशान करने वाला बनता जा रहा है। बुखार एक बार ठीक होने के बजाय 2–3 दिन की राहत के बाद दोबारा लौट रहा है—वह भी ज्यादा तेज और गंभीर लक्षणों के साथ। डॉक्टरों के अनुसार, इस दोबारा हमले से मरीज अधिक कमजोर हो रहे हैं और रिकवरी का समय भी बढ़ गया है।

पहले हल्का, फिर अचानक तेज हमला

डॉक्टरों का कहना है कि बीमारी की शुरुआत अक्सर गले में तेज दर्द और हल्के बुखार से होती है। शुरुआती 24 से 48 घंटे में मरीज इसे सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज कर देता है।
लेकिन 48 से 72 घंटे बाद अचानक तेज बुखार, जोड़ों व मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और अत्यधिक कमजोरी के साथ बीमारी फिर लौट आती है। कई मामलों में बुखार उतरने के बाद दोबारा चढ़ रहा है, जिसके चलते मरीजों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा है।

भोपाल के अस्पतालों में रोज 1000 से ज्यादा मरीज

जेपी अस्पताल, हमीदिया अस्पताल, एम्स भोपाल सहित निजी अस्पतालों में रोजाना 1000 से अधिक मरीज बुखार, सर्दी-खांसी और गले के दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
बच्चे, युवा और बुजुर्ग—कोई भी इस संक्रमण से अछूता नहीं है।

कामकाजी लोग ज्यादा प्रभावित

डॉक्टरों के अनुसार, कामकाजी लोग पूरा आराम नहीं कर पा रहे हैं। बुखार उतरते ही काम पर लौटने से वायरस पूरी तरह खत्म नहीं हो पाता और दोबारा उभर जाता है। इससे कमजोरी बढ़ती है और शरीर को रिकवर होने में ज्यादा समय लगता है।

जांच के बिना दवा लेना खतरनाक

एमडी मेडिसिन डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक—

  • मौसम में उतार-चढ़ाव
  • बढ़ता प्रदूषण
  • कमजोर इम्युनिटी

इस संक्रमण की मुख्य वजहें हैं। कई मरीजों में डेंगू और चिकनगुनिया जैसे लक्षण भी दिख रहे हैं।
ऐसे में ब्लड टेस्ट और प्लेटलेट काउंट की नियमित जांच बेहद जरूरी है। बिना जांच एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं लेना स्थिति बिगाड़ सकता है। इसी कारण सरकारी और निजी अस्पतालों में अधिकांश मरीजों की ब्लड जांच कराई जा रही है।

3 दिन बाद बुखार लौटे तो तुरंत जांच कराएं

सीएमएचओ भोपाल डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण कई मरीज लंबे समय तक परेशान हो रहे हैं। ठीक होने के बाद भी थकान, कमजोरी और गले में दर्द बना रह सकता है।
आमतौर पर वायरल फीवर एक सप्ताह में ठीक हो जाता है, लेकिन मौजूदा मामलों में लक्षण ज्यादा समय तक बने रह रहे हैं।

उन्होंने लोगों को कोविड जैसी सावधानियों—मास्क, दूरी और स्वच्छता—का पालन करने की सलाह दी है, ताकि संक्रमण दूसरों तक न फैले।

लक्षण जो कर रहे हैं अलर्ट

  • गले में जलन या तेज दर्द
  • 1–2 दिन हल्का बुखार, फिर अस्थायी राहत
  • 3–4 दिन बाद दोबारा तेज बुखार
  • जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, शरीर टूटना
  • अत्यधिक थकान, कमजोरी और सिरदर्द
  • सर्दी-खांसी

बचाव और सावधानियां

  • बुखार उतरने के बाद भी पूरा आराम करें
  • डॉक्टर की सलाह से ही दवाएं लें
  • पर्याप्त पानी, ओआरएस और हल्का भोजन लें
  • मच्छरों से बचाव और साफ-सफाई पर ध्यान दें

डॉक्टरों की सलाह

  • वायरल फीवर में बाहर का खाना न खाएं
  • बुखार या सर्दी-खांसी को नजरअंदाज न करें
  • बिना डॉक्टर की सलाह कोई दवा न लें
  • पेशाब कम हो या पैरों में सूजन आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

पूरा आराम, जांच और सावधानी ही वायरल फीवर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

साभार… 

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