ईंधन और शिपिंग महंगी, खाने का तेल बना महंगाई का बड़ा उदाहरण
Dearness: देश में बढ़ती महंगाई को समझने के लिए सरसों तेल एक अहम उदाहरण बनकर सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, खासकर ईरान-इजराइल संघर्ष के चलते शिपिंग और ट्रांसपोर्ट लागत में बढ़ोतरी ने रोजमर्रा की चीजों के दाम पर सीधा असर डाला है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल महंगा होता है, तो उसका असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खाने के तेल, पैकेजिंग और उत्पादन लागत पर भी पड़ता है।
आयात महंगा, घरेलू तेल पर बढ़ा दबाव
भारत में पाम और सोयाबीन तेल का बड़ा हिस्सा इंडोनेशिया, मलेशिया और अर्जेंटीना से आयात होता है।
शिपिंग लागत बढ़ने से ये तेल महंगे हुए, जिसके बाद उपभोक्ताओं ने सरसों तेल की ओर रुख किया। मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में सरसों तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई।
उत्पादन और पैकेजिंग लागत में उछाल
सरसों तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण उत्पादन लागत का बढ़ना भी है।
- फैक्ट्रियों में बिजली और ईंधन खर्च बढ़ा
- प्लास्टिक पैकेजिंग महंगी हुई, जो पेट्रोलियम से बनती है
इससे कुल लागत बढ़ी और कंपनियों ने कीमतों में इजाफा कर दिया।
बाजार की मनोवृत्ति ने बढ़ाई तेजी
व्यापारियों को भविष्य में और महंगाई की आशंका है। ऐसे में कई जगह स्टॉक रोककर ऊंचे दाम पर बिक्री की जा रही है। इससे बाजार में कृत्रिम कमी बनी और कीमतें और बढ़ गईं।
बिजली और गैस के दाम बढ़ने से मिडिल क्लास पर असर
डबल मार: बढ़े बिल और बढ़ा खर्च
ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच बिजली और रसोई गैस के दाम बढ़ने से आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
- बिजली बिल में बढ़ोतरी
- गैस सिलेंडर महंगा
👉 हर महीने का बजट सैकड़ों रुपए तक बढ़ गया है
एसी और ईवी चलाना भी महंगा
बिजली दरों में वृद्धि का असर लाइफस्टाइल पर भी पड़ा है।
- एसी चलाने पर अतिरिक्त खर्च
- ईवी चार्जिंग महंगी
दोनों मिलाकर हर महीने करीब 300 रुपए तक अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।
नाश्ता और होटल का खाना भी महंगा
खाने के तेल और कमर्शियल गैस महंगी होने से होटल और नाश्ते की दुकानों ने दाम बढ़ा दिए हैं।
- पोहा, समोसा, चाय 1 से 5 रुपए तक महंगे
- थाली 15–30 रुपए तक महंगी
व्यापारियों के अनुसार, गैस की कमी के चलते कोयले का उपयोग बढ़ा, जिससे लागत और बढ़ गई।
पैकेजिंग, दवाइयों और रियल एस्टेट पर असर
पैकेजिंग में 30–60% तक बढ़ोतरी
कच्चे माल की कमी के कारण प्लास्टिक, पेपर और फाइबर महंगे हो गए हैं।
👉 इसका असर डेयरी, मिठाई, दवाइयों और स्टेशनरी पर पड़ा है।
दवाइयों की सप्लाई पर संकट
फार्मा सेक्टर में लागत बढ़ने के बावजूद दाम सीमित हैं।
👉 ऐसे में उत्पादन घटने और भविष्य में दवाइयों की कमी की आशंका जताई जा रही है।
रियल एस्टेट सेक्टर पर दबाव
निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट, पाइप, टाइल्स और पेंट महंगे हो गए हैं।
👉 घर बनाना और खरीदना महंगा पड़ रहा है।
विशेषज्ञों की राय: आयात निर्भरता से बढ़ा असर
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, खाड़ी देशों पर निर्भरता के कारण सप्लाई बाधित होने का सीधा असर स्थानीय बाजार पर पड़ा है। हालांकि फिलहाल डीजल-पेट्रोल के दाम स्थिर रहने से थोड़ी राहत बनी हुई है।
साभार…
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