अध्यक्ष के घर के सामने रोड पर बैठे दूसरे गुट के नेता

Factionalism: बैतूल। वर्षों से विपक्ष में रहने के बावजूद कांग्रेस है कि गुटबाजी से उभर नहीं पा रही है और समय-समय पर इसकी बानगी जिले में दिखती रहती है। कभी अनुशासन समिति का गठन और उसको भंग कराना तो कभी सार्वजनिक प्रदर्शनों में किसी एक गुट का गायब रहना आम बात हो गई है। और अब तो यह हालत हो गई है कि इस गुटबाजी के प्रदर्शन से ना तो प्रदेश स्तर के दिग्गज कांग्रेस नेताओं को कोई फर्क पड़ रहा है और ना ही जिले के कांग्रेसियों को।
अध्यक्ष के घर के सामने किया प्रदर्शन
पूर्व विधायक एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष निलय डागा का थाना रोड, कोठीबाजार, बैतूल में गांधी चौक के सामने निवास है। श्री डागा के निवास के ठीक सामने कल पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तथा वर्तमान में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ओबीसी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय पदाधिकारी हेमंत वागद्रे अपने कुछ समर्थकों के साथ थाना रोड की सडक़ पर चक्काजाम कर चटाई पर बैठे हुए दिखाई दिए। गांधी चौक में नगर पालिका परिषद द्वारा अंडर ग्राऊंड पार्किंग का कार्य किया जा रहा है। इसके चलते वहां लगे अशोक स्तंभ को भी हटाया गया था। इसी को लेकर कांग्रेसी विरोध कर रहे थे और कुछ देर तक नारेबाजी भी हुई। लेकिन इस पूरे प्रदर्शन में जिला कांग्रेस अध्यक्ष निलय डागा स्वयं या उनका कोई समर्थक कांग्रेसी नहीं दिखाई दिया।
अनुशासन समिति बनते ही हो गई भंग
जिला कांग्रेस अध्यक्ष निलय डागा ने कांग्रेसियों में अनुशासन और अनर्गल बयानबाजी को रोकने के उद्देश्य से जिला स्तर पर एक अनुशासन समिति का गठन किया गया था जिसमें वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजेंद्र जायसवाल और अजीत आर्य सहित पांच लोग शामिल किए गए थे लेकिन समिति के गठन के दूसरे दिन ही प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष ने यह कहकर समिति भंग कर दी थी कि इसके लिए प्रदेश कांग्रेस से अनुमति नहीं ली गई थी। बताया जा रहा है कि यह कार्य कांग्रेस के उस गुट ने करवाया जिसकी भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में तगड़ी पकड़ है। इस तरह से कांग्रेसी अभी भी आपस में ही लडऩे में व्यस्त हैं।
भाजपा के विरोध में भी दिखता है एक ही गुट सामने
जिला स्तर पर प्रमुख विपक्षी दल होने के बावजूद कांग्रेस का एक ही गुट भाजपा की सरकार के विरोध में मुखर दिखाई देता है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष निलय डागा हर कार्यक्रम में सबसे पहले शुरूवात भाजपा संगठन और सरकार को कोसने में करते हैं। जिले की राजनीति जानने वालों का यह मानना है कि जिस तरह से जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुखरता से विरोध में आगे रहते हैं ऐसा विरोध दूसरे गुट ने संभवत: इतने वर्षों में कभी नहीं किया गया और शनै-शनै कांग्रेस के कमजोर होने का कारण भी यही माना जा रहा है।
Leave a comment