सीधी में मिली हजारों साल पुराने हाथियों के पूर्वजों की निशानी
Fossil: सीधी जिले के सिहावल ब्लॉक स्थित कोरौली कला गांव की अतरैला पहाड़ी में प्राचीन जीवाश्म मिलने से वैज्ञानिकों में उत्साह है। प्रारंभिक सर्वेक्षण में यह दावा किया गया है कि ये अवशेष प्रोबोसिडियन कुल (हाथियों के पूर्वज) से जुड़े हो सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, इन जीवाश्मों की उम्र करीब 25 हजार से ढाई लाख वर्ष पुरानी हो सकती है।
🔬 वैज्ञानिक टीम ने किया स्थल परीक्षण
पीएमश्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की टीम ने इस स्थल का निरीक्षण किया। टीम में शामिल थे:
- डॉ. हर्षित सोनी (प्राणी शास्त्र विभाग)
- डॉ. ऋषभ देव साकेत
- पुरातत्वविद डॉ. धीरेंद्र शर्मा
जांच के दौरान मिले साक्ष्य:
- बड़े शाकाहारी जीवों के दांतों के टुकड़े
- अस्थि खंड (हड्डियों के अवशेष)
दांतों में एनामेल प्लेट, डेंटिन और घिसाव के स्पष्ट निशान पाए गए, जो हाथी कुल के प्राचीन जीवों की ओर संकेत करते हैं।
🌱 प्राचीन मिट्टी (पैलियोसोल) के भी मिले संकेत
वैज्ञानिकों को स्थल पर:
- कठोर अवसादी मिट्टी
- पौधों की जड़ों के निशान
- सूक्ष्म छिद्र संरचनाएं
मिली हैं, जो पैलियोसोल (प्राचीन मिट्टी) के संकेत माने जा रहे हैं।
👉 इससे प्राचीन पर्यावरण और जलवायु को समझने में मदद मिल सकती है।
🏞️ सोन नदी घाटी से जुड़ा हो सकता है क्षेत्र
प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिला है कि यह इलाका सोन नदी घाटी के प्राचीन अवसादी निक्षेपों से जुड़ा हो सकता है।
इस क्षेत्र में पहले भी प्लीस्टोसीन काल के विशाल जीवों के जीवाश्म मिल चुके हैं।
⏳ सटीक उम्र जानने के लिए जरूरी वैज्ञानिक परीक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार:
- कार्बन डेटिंग और डीएनए परीक्षण संभव नहीं
- सटीक उम्र के लिए यूरेनियम डेटिंग जरूरी
- विस्तृत भूवैज्ञानिक अध्ययन और तुलनात्मक विश्लेषण भी आवश्यक
⚠️ संरक्षण की मांग, खतरे में साक्ष्य
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि:
- स्थानीय गतिविधियों से कुछ जीवाश्म क्षतिग्रस्त हो चुके हैं
- बिना संरक्षण के यह महत्वपूर्ण धरोहर नष्ट हो सकती है
इसलिए प्रशासन से तत्काल संरक्षण और नियंत्रित वैज्ञानिक अध्ययन की मांग की गई है।
साभार…
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