आदिवासियों की जमीन पर दूसरों ने कराया पंजीयन
Fraud: भैंसदेही।/शंकर राय/ किसानों को राहत देने के लिए सरकार द्वारा संचालित की जा रही भावांतर भुगतान योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है। लेकिन इस योजना के क्रियान्वयन में अनियमितताएं और फर्जीवाड़े की शिकायतें अब लगातार सामने आ रही हैं। ग्रामीण अंचलों में मेहनतकश किसानों की मेहनत पर बिचौलियों और भ्रष्ट कर्मचारियों की नजर पड़ चुकी है। ऐसे में योजना की साख और किसानों के हक दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
फर्जी तरीके से किया 16 एकड़ का पंजीयन
जानकारी के अनुसार भैंसदेही क्षेत्र की चिल्कापुर गुदंगाव सहकारी समिति में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। बताया जा रहा है कि समिति के ऑपरेटर ने जिला सहकारी बैंक भैंसदेही में सुरक्षा कर्मी के पद पर पदस्थ अशोक पंडरी कुबडे के नाम पर सिर्फ 2 एकड़ जमीन है फिर भी फर्जी तरीके से 16 एकड़ का पंजीयन कर दिया, और वह भी तहसीलदार के द्वारा सत्यापित कर दिया गया।
जांच में सामने आया है कि इस पंजीयन में किसान संग्राम और मुग्गीलाल की वास्तविक भूमि को गलत तरीके से अशोक कुबडे के नाम से जोड़ा गया। इतना ही नहीं, रामघाटी क्षेत्र में भी फर्जी भूमि विवरण दर्शाया गया है। इस पूरे मामले में सर्वेयर नंदू अहाके की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। जब इस संबंध में चिल्कापुर समिति के ऑपरेटर इंद्रदेव मस्की से बात की गई, तो उन्होंने पहले तो कहा कि पंजीयन कैंसिल कर दिया गया है। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि अशोक कुबड़े के पास तो कोई जमीन नहीं है, फिर पंजीयन कैसे कर दिया गया, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि गलती हो गई।
आगे पूछने पर यह भी स्वीकार किया कि पंजीयन के समय अशोक पंडरी खुद उपस्थित नहीं थे, बल्कि उन्होंने ओट लेकर पंजीयन किया था। ऐसे कई मामलों में आदिवासी किसानों की भूमि पर फर्जी नामों से पंजीयन कराए जाने की बात सामने आ रही है। इससे असली किसानों को न तो भावांतर योजना का लाभ मिल पा रहा है और न ही उनकी उपज का सही मूल्य। यदि प्रशासन ने इस तरह की गड़बडय़िों पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो यह योजना किसानों के हित के बजाय फर्जीवाड़े का जरिया बन सकती है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार विभाग इस गंभीर मामले पर क्या कदम उठाता है।
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