Funeral: दरभंगा। भारत-चीन युद्ध के दौरान भारत सरकार की अपील पर अपने खजाने के द्वार खोलकर करीब 600 किलो सोना दान करने वाली दरभंगा राजवंश की विरासत की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार दरभंगा राज परिसर स्थित माधेश्वर प्रांगण में पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। बिहार सरकार की ओर से उन्हें राजकीय सम्मान दिया गया, जबकि उनके पोते रत्नेश्वर सिंह ने मुखाग्नि दी।
अंतिम संस्कार में बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल भी शामिल हुए और महारानी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। महारानी कामसुंदरी देवी, दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह की तीसरी और अंतिम पत्नी थीं। दरभंगा राजपरिवार ने देश और समाज के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया है, जिसमें निजी संपत्ति से सड़कें, शिक्षा संस्थान और विश्वविद्यालय स्थापित करना शामिल है।
हालांकि अंतिम यात्रा से पहले महारानी के आवास पर पारिवारिक विवाद के कारण माहौल तनावपूर्ण हो गया। संपत्ति और उत्तराधिकार को लेकर परिजनों के बीच बहस बढ़कर मारपीट में बदल गई। पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में हुई झड़प के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और दोनों पक्षों को अलग किया। इस घटना को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर जारी है।
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