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Gold reserve: डॉलर पर निर्भरता घटाने की दौड़, दुनिया के देश तेजी से बढ़ा रहे हैं गोल्ड रिजर्व

डॉलर पर निर्भरता घटाने की दौड़, दुनिया

Gold reserve:नईदुनिया। रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका की सैंक्शन पॉलिसी और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता ने अब देशों की वित्तीय रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है। दुनिया के कई देश अब डॉलर पर निर्भरता घटाने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सोना (Gold Reserve) तेजी से खरीद रहे हैं।

हालिया रिसर्च के मुताबिक, रूस के विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज किए जाने और वित्तीय प्रतिबंधों के बाद यह स्पष्ट हो गया कि डॉलर को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी वजह से भारत, चीन, रूस और तुर्किये जैसे देश सोने को सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प मान रहे हैं।

🔹 सोना क्यों बन रहा सुरक्षित विकल्प

विशेषज्ञों का कहना है कि सोना ऐसी संपत्ति है जिस पर न डिफॉल्ट का खतरा होता है और न ही किसी तरह के प्रतिबंध लग सकते हैं। डॉलर जैसी मुद्राओं पर भरोसा घटने पर केंद्रीय बैंक सोने को जोखिम-मुक्त संपत्ति के रूप में अपनाते हैं। पिछले छह महीनों में सोने की कीमतों में 65% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

🔹 डी-डॉलराइजेशन की दिशा में बढ़ते कदम

गोल्ड रिजर्व बढ़ाने के पीछे देशों का मुख्य उद्देश्य डॉलर पर निर्भरता कम करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, डी-डॉलराइजेशन की इस नीति से देश वित्तीय सुरक्षा, मौद्रिक स्थिरता और आर्थिक स्वतंत्रता हासिल कर रहे हैं।

🔹 रिकॉर्ड गोल्ड खरीद की तैयारी

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, 2025 में दुनिया के केंद्रीय बैंक लगभग 900 टन सोना खरीद सकते हैं। यह लगातार चौथा साल होगा जब औसत से अधिक सोना खरीदा जाएगा। इस आक्रामक खरीदारी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों को ऊंचा बनाए रखा है।

🔹 डॉलर की घटती पकड़

आईएमएफ के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर अभी भी वैश्विक भंडार का 58% हिस्सा है, लेकिन यह हिस्सा धीरे-धीरे घट रहा है। राजनीतिक और आर्थिक जोखिमों के चलते कई देश अब अमेरिकी संपत्तियों में निवेश से परहेज कर रहे हैं, जबकि सोना एक सार्वभौमिक और स्थिर संपत्ति के रूप में उभर रहा है।

🔹 चीन की रणनीति सबसे आक्रामक

इस वैश्विक रुझान की अगुवाई चीन कर रहा है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने लगातार 18 महीनों तक अपने सोने के भंडार में इजाफा किया है। विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम न केवल अमेरिकी प्रतिबंधों से बचाव के लिए है, बल्कि ब्रिक्स+ देशों के बीच गैर-डॉलर व्यापार को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह रुझान जारी रहा, तो आने वाले समय में सोने की कीमतें और ऊंची जा सकती हैं और डॉलर का वैश्विक दबदबा धीरे-धीरे कम होता जाएगा।

साभार… 

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