Harsh criticism: इंदौर। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में चल रही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि इस घटना ने इंदौर शहर की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर अब दूषित पानी के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगर पीने का पानी ही दूषित हो, तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह समस्या केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे इंदौर शहर का पेयजल सुरक्षित नहीं है।
15 जनवरी को चीफ सेक्रेटरी से सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में वर्चुअली उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी।
अब तक 17 मौतें, 421 मरीज भर्ती
दूषित पानी पीने से अब तक—
- 17 लोगों की मौत हो चुकी है
- 421 मरीज अस्पतालों में भर्ती किए गए
- इनमें से 311 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं
- 110 मरीज अभी भर्ती,
- 15 मरीज आईसीयू में इलाजरत हैं
इसके अलावा उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं, जिनमें से 6 मरीजों को अरबिंदो हॉस्पिटल रेफर किया गया है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप: अब भी दूषित पानी की सप्लाई
31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इस पर दाखिल की गई स्टेटस रिपोर्ट पर याचिकाकर्ताओं ने असंतोष जताया।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि प्रभावित इलाकों में अब भी दूषित पानी ही सप्लाई किया जा रहा है, जो न तो स्वच्छ है और न ही पीने योग्य।
शिकायतें सुनी जातीं तो नहीं होती ये घटना
अन्य याचिकाओं में कहा गया कि घटना से पहले स्थानीय नागरिकों ने कई बार शिकायतें की थीं, लेकिन प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। यदि शिकायतों पर ध्यान दिया गया होता, तो यह त्रासदी टाली जा सकती थी।
सीनियर काउंसिल ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2022 में महापौर द्वारा नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन फंड जारी न होने से काम अब तक शुरू नहीं हो पाया।
प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट पर भी नहीं हुई कार्रवाई
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि 2017-18 में पानी के 60 सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 59 सैंपल पीने योग्य नहीं पाए गए। यह रिपोर्ट मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की थी, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इस मामले में संबंधित अधिकारी सिर्फ सिविल ही नहीं, बल्कि आपराधिक जिम्मेदारी के भी दोषी हैं। मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की गई है।
नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को निर्देश दिया है कि वे नया जवाब और विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पेयजल का अधिकार भी शामिल है।
मामले को 7 श्रेणियों में बांटा गया
हाईकोर्ट ने पूरे मामले से जुड़े मुद्दों को 7 श्रेणियों में वर्गीकृत किया है—
- प्रभावित लोगों के लिए तत्काल और आपात निर्देश
- रोकथाम एवं सुधारात्मक उपाय
- जिम्मेदारी तय करना
- अनुशासनात्मक कार्रवाई
- मुआवजा
- स्थानीय निकायों को निर्देश
- जन-जागरूकता और पारदर्शिता
फेक न्यूज और रोजाना बुलेटिन का मुद्दा
फेक न्यूज को लेकर मनोज भरने की ओर से आवेदन दिया गया, जिसमें गलत प्रकाशन पर रोक की मांग की गई।
अन्य वकीलों ने सुझाव दिया कि कोरोना काल की तरह रोजाना बुलेटिन जारी किया जाए और कलेक्टर के जरिए दैनिक रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
नई जनहित याचिकाएं भी दाखिल
- ट्रेजर फैंटेसी टाउनशिप की ओर से बताया गया कि वहां के रहवासी भी एक साल से दूषित पानी की समस्या झेल रहे हैं
- हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष रितेश ईनानी ने घटना की जांच और शुद्ध जल आपूर्ति की मांग की
- महेश गर्ग की याचिका में शहर की सभी पानी टंकियों की सफाई के निर्देश मांगे गए
कलेक्टर–निगमायुक्त ने किया निरीक्षण
मंगलवार सुबह कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने प्रभावित भागीरथपुरा क्षेत्र का दौरा किया।
- लाइन लीकेज सुधार कार्य
- दवा वितरण
- टैंकरों से जल आपूर्ति का निरीक्षण किया गया।
कलेक्टर ने बताया कि रिंग सर्वे, सैंपल कलेक्शन और मॉनिटरिंग लगातार जारी है। लोगों को पानी उबालकर और छानकर पीने की सलाह दी जा रही है।
टैंकरों से जल आपूर्ति के फोटो कोर्ट में पेश
नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि—
- 30 दिसंबर: 36 टैंकर
- 31 दिसंबर: 34 टैंकर
- 1 जनवरी: 33 टैंकर
से स्वच्छ पानी सप्लाई किया गया। इसके फोटो भी कोर्ट में प्रस्तुत किए गए।
अधिकारियों पर कार्रवाई
स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि—
- जोन-4 के जोनल अधिकारी और असिस्टेंट इंजीनियर सस्पेंड
- सब इंजीनियर की सेवा समाप्त
की गई है। इसके बाद हाईकोर्ट ने शासन से डिटेल्ड रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
साभार…
Leave a comment