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Heart Transplant: डॉ. अनुज लश्करे की देखरेख में हुआ बैतूल का पहला हार्ट ट्रांसप्लांट

डॉ. अनुज लश्करे की देखरेख में हुआ

अहमदाबाद से स्वस्थ होकर घर लौटे आठनेर के अलकेश डढोरे

Heart Transplant: बैतूल। जिले के लिए गर्व की बात है कि बैतूल के लश्करे हास्पिटल के संचालक डॉ. मनीष लश्करे एमडी मेडिसीन के सुपुत्र डॉ. अनुज लश्करे की देखरेख में अहमदाबाद में आठनेर के अलकेश डढोरे का पहला हृदय प्रत्यारोपण किया गया है। वे स्वस्थ होकर अहमदाबाद से अपने घर आठनेर लौट चुके हैं। उनकी यह कहानी न केवल साहस और धैर्य की मिसाल है, बल्कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए उम्मीद का संदेश भी देती है।


जिले का पहला हुआ हृदय प्रत्यारोपण


जिले के आठनेर क्षेत्र के ग्राम पुसली निवासी 40 वर्षीय अलकेश डडोरे ने अपने साहस और मजबूत इच्छाशक्ति से एक नई मिसाल कायम की है। अहमदाबाद स्थित यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी में उनका सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। सर्जरी के लगभग एक महीने बाद उनकी सेहत में सुधार हुआ और अब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। फिलहाल वे नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं।


हृदय रोग से परेशान थे अलकेश


अलकेश डडोरे बचपन से ही हृदय संबंधी दुर्लभ बीमारी से पीडि़त थे। इस बीमारी के कारण उनके हृदय की संरचना में गंभीर समस्या थी। चिकित्सकीय जांच में दाहिने वेंट्रिकल का एट्रियलाइजेशन, गंभीर ट्राइकसपिड रिगर्जिटेशन और एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट जैसी स्थितियां सामने आई थीं। इन समस्याओं के कारण उनके दिल की कार्यक्षमता प्रभावित रहती थी।


कई बार पड़ चुके थे दौरे


करीब डेढ़ से दो दशक के दौरान उन्हें कई बार वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया के खतरनाक दौरे पड़े। इन दौरों के कारण कई बार उन्हें बैतूल में अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। स्थिति गंभीर होने पर कई बार इलेक्ट्रिक शॉक यानी डीसी कार्डियोवर्जन देकर उनकी जान बचाई गई। लगातार इलाज के बावजूद समय के साथ हृदय की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होती चली गई।


सर्जरी हुई थी पर यथावत थी समस्या


बीमारी की गंभीरता को देखते हुए पहले ट्राइकसपिड वाल्व रिपेयर और एएसडी क्लोजर की पेलिएटिव सर्जरी भी की गई थी। इस उपचार से कुछ समय तक राहत मिली, लेकिन बाद में फिर से हृदय विफलता और अनियमित धडक़नों की समस्या बढऩे लगी। धीरे-धीरे हृदय की कार्यक्षमता घटकर लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक पहुंच गई।


अहमदाबाद में हुआ हार्ट ट्रांसप्लांट


स्थिति अत्यधिक गंभीर होने पर उन्हें आगे के इलाज के लिए अहमदाबाद के यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी भेजा गया। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने विस्तृत जांच के बाद हृदय प्रत्यारोपण की सलाह दी। अलकेश डडोरे ने धैर्य के साथ इस चुनौती को स्वीकार किया और करीब चार महीने तक अस्पताल में रहकर डोनर हृदय का इंतजार किया। पिछले महीने उपयुक्त डोनर मिलने के बाद डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक हार्ट ट्रांसप्लांट किया।


इलाज का पूरा खर्च रहा शून्य


इस उपचार की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने और जटिल हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी होने के बावजूद उनका पूरा इलाज बिना किसी खर्च के पूरा हुआ। यह देश में उपलब्ध उन्नत चिकित्सा सुविधाओं और जनहितकारी स्वास्थ्य योजनाओं का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।


जिले के लिए बनी प्रेरणादायक उपलब्धि


संभावना जताई जा रही है कि बैतूल जिले के किसी मरीज का यह पहला सफल हृदय प्रत्यारोपण है। इस उपलब्धि ने पूरे जिले में आशा और सकारात्मकता का संदेश दिया है। उपचार की पूरी प्रक्रिया में डॉ. अनुज लश्करे, जो वर्तमान में इसी संस्थान में कार्यरत हैं, ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उपचार तथा प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहयोग दिया।


दृढ़ इच्छाशक्ति से मिली सफलता


अलकेश डडोरे की यह कहानी साहस, धैर्य और सकारात्मक सोच की मिसाल है। गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए यह घटना उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ कठिन से कठिन परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है।

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