चैत्र नवरात्रि की भी शुरुआत, घर-घर में सजेंगी गुड़ी और तोरण
Inauguration: हिंदू पंचांग के अनुसार, गुड़ी पड़वा के साथ आज से हिंदू नववर्ष का शुभारंभ हो रहा है। यह पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है, जो इस बार 19 मार्च को पड़ रही है।
शुभ मुहूर्त और तिथि
- प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 19 मार्च, सुबह 6:52 बजे
- प्रतिपदा तिथि समाप्त: 20 मार्च, सुबह 4:52 बजे
इसलिए गुड़ी पड़वा का पर्व 19 मार्च को ही मनाया जा रहा है।
विशेष संयोग: नवरात्रि का भी आरंभ
इस बार गुड़ी पड़वा का महत्व और बढ़ गया है, क्योंकि इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ हो रहा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी।
कैसे मनाएं गुड़ी पड़वा
इस दिन घर और मुख्य द्वार को विशेष रूप से सजाया जाता है—
- दरवाजे पर आम के पत्तों और फूलों का तोरण लगाएं
- सुंदर रंगोली बनाएं
- बांस की लकड़ी पर रंगीन वस्त्र बांधकर ऊपर तांबे या चांदी का लोटा उल्टा रखें
- इसे नीम की पत्तियों और चीनी की माला से सजाकर घर के ऊंचे स्थान पर स्थापित करें
इसे ही “गुड़ी” कहा जाता है, जो विजय और समृद्धि का प्रतीक है।
नीम-गुड़ का प्रसाद
इस दिन नीम की पत्तियां, गुड़ और इमली का मिश्रण खाया जाता है।
यह जीवन में सुख-दुख के संतुलन और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है।
महत्व
गुड़ी पड़वा विशेष रूप से महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन इसका महत्व पूरे देश में हिंदू नववर्ष के रूप में है।
साभार…
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