अब सरकारी और निजी दोनों लैब में अनिवार्य होगी जांच, 1 अप्रैल से पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
Pattern: भोपाल। मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने सड़कों और सरकारी भवनों के निर्माण में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। विभाग ने निर्माण सामग्री की जांच (मटेरियल टेस्टिंग) की पुरानी व्यवस्था को बदलते हुए नई गाइडलाइन जारी की है। इसका उद्देश्य निर्माण कार्यों में लापरवाही और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है। नई व्यवस्था के तहत अब ठेकेदारों को केवल निजी प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहने की छूट नहीं होगी। विभाग ने परीक्षण का नया अनुपात तय किया है, जिसके अनुसार अब कुल परीक्षणों में से कम से कम 10 प्रतिशत जांच सरकारी प्रयोगशालाओं में और 10 प्रतिशत जांच सूचीबद्ध निजी प्रयोगशालाओं में कराना अनिवार्य होगा।
निजी लैब के एकाधिकार पर खत्म होगा नियंत्रण
अब तक सड़क और भवन निर्माण में इस्तेमाल होने वाली गिट्टी, सीमेंट, डामर और मिट्टी जैसी निर्माण सामग्री की जांच मुख्य रूप से निजी प्रयोगशालाओं के माध्यम से ही कराई जाती थी। विभागीय स्तर पर कड़े नियंत्रण के अभाव में अक्सर यह शिकायतें सामने आती थीं कि ठेकेदार और निजी लैब की मिलीभगत से खराब गुणवत्ता की सामग्री को भी पास कर दिया जाता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पहली बार इस एकाधिकार को समाप्त कर परीक्षण की स्पष्ट व्यवस्था तय कर दी गई है, जिससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सीधा नियंत्रण रखा जा सकेगा।
1 अप्रैल से पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल
विभाग ने जांच के साथ रिपोर्टिंग प्रणाली को भी पूरी तरह डिजिटल करने का फैसला लिया है। अब सभी परीक्षणों की एंट्री वर्क्स मैनेजमेंट सिस्टम (WMS) पोर्टल पर ऑनलाइन करना अनिवार्य होगा। कार्यपालन यंत्रियों को निर्देश दिए गए हैं कि 1 अप्रैल से बिना ऑनलाइन प्रविष्टि के कोई भी गुणवत्ता रिपोर्ट मान्य नहीं होगी। इससे मुख्यालय में बैठे वरिष्ठ अधिकारी भी एक क्लिक में देख सकेंगे कि किस प्रोजेक्ट में सामग्री की जांच किस प्रयोगशाला में हुई और उसका परिणाम क्या रहा।
प्रदेश में इतनी लंबी है सड़कों की नेटवर्क
मध्यप्रदेश में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत कुल 77,268 किलोमीटर लंबी सड़कें हैं। इनमें लगभग 9,278 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग, 10,465 किमी स्टेट हाइवे, 22,517 किमी मुख्य जिला मार्ग और 35,008 किमी अन्य जिला व ग्रामीण मार्ग शामिल हैं। प्रदेश में करीब 6,000 किमी फोरलेन और 13,000 किमी डबल लेन सड़कें हैं। इनमें से लगभग 20 प्रतिशत सड़कों का हर साल पुनर्निर्माण या नवीनीकरण किया जाता है।
पारदर्शिता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए लिया फैसला
विभाग के अनुसार यह संशोधन निर्माण कार्यों को तय मानकों के अनुरूप और अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से किया गया है। इसके लिए 6 सितंबर 2019 को जारी पुराने निर्देशों में बदलाव किया गया है।
12 मार्च को जारी हुआ आदेश
12 मार्च 2026 को जारी आदेश के अनुसार अब किसी भी निर्माण कार्य में कुल परीक्षणों का कम से कम 10 प्रतिशत विभागीय मंडल या परिक्षेत्र स्तर की प्रयोगशालाओं में कराया जाएगा, जबकि 10 प्रतिशत परीक्षण सूचीबद्ध निजी एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कराना अनिवार्य होगा। इस संबंध में विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ केपीएस राणा ने बताया कि प्रदेश में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार नए नवाचार किए जा रहे हैं और यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू कर दी जाएगी।
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