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Prayer: रेणुका सिद्ध पीठ धामनगांव में आस्था का अद्भुत संगम

रेणुका सिद्ध पीठ धामनगांव में

5 अप्रैल को गाड़ा खींचकर पूरी करेंगे मन्नत

Prayer: आठनेर (बैतूल)। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर क्षेत्र के प्रसिद्ध रेणुका सिद्ध पीठ धामनगांव में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा दृश्य देखने को मिल रहा है। यहां भक्तों ने ज्योत प्रज्वलित कर अपनी आस्था व्यक्त की और 5 अप्रैल को गाड़ा खींचकर मन्नत पूरी करने की तैयारी कर रहे हैं।


500 वर्षों पुरानी परंपरा आज भी जीवित

धामनगांव में यह परंपरा करीब 500 वर्षों से चली आ रही है, जिसे ग्रामीण आज भी पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभा रहे हैं।
मान्यता है कि जब भक्तों की मन्नत पूरी होती है—चाहे वह बीमारी से मुक्ति, संतान प्राप्ति, व्यापार में उन्नति या जीवन संकट से छुटकारा हो—तो वे माता को धन्यवाद देने के लिए कठिन तपस्या करते हैं।


गाड़ा खींचकर और नीम धारण कर निभाते हैं मन्नत

  • पुरुष भक्त नाड़ा गाड़ा (बैलगाड़ी/भारी पत्थर) खींचकर अपनी भक्ति प्रकट करते हैं
  • महिलाएं शरीर पर नीम की पत्तियां धारण कर तपस्या करती हैं
  • इसे शारीरिक और मानसिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है

यह परंपरा देवी के प्रति समर्पण, आत्म-शुद्धि और शक्ति साधना का प्रतीक है।


“उदो-उदो” के जयघोष से गूंजता माहौल

चैत्र नवरात्रि में भक्त “उदो-उदो” का जयघोष करते हैं, जो देवी की विजय और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
यह जयकारा सकारात्मक ऊर्जा फैलाने और नकारात्मकता को दूर करने का माध्यम भी माना जाता है।


हिवरा और आठनेर में भी दिखी भक्ति की झलक

आठनेर क्षेत्र के हिवरा गांव में स्थित अम्बा देवी मंदिर हिवरा में बुधवार को हजारों श्रद्धालु जुटे।

  • पूजा-अर्चना के बाद भक्तों ने गाड़ा खींचकर मन्नत पूरी की
  • “उदो-उदो” के जयघोष के साथ भक्ति का माहौल बना
  • कई भक्तों ने शरीर में नाड़ा टोचकर अपनी आस्था व्यक्त की

परंपरा से जुड़ा धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए प्राचीन काल में संतों और देवताओं ने कठोर तपस्या की थी। उसी परंपरा का पालन आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में किया जाता है। पहले इस परंपरा में सजी हुई बैलगाड़ी में राम-लक्ष्मण की झांकी निकालने की भी परंपरा थी, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है।

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