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Religious process: केदारनाथ धाम के कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू

केदारनाथ धाम के कपाट

हजारों श्रद्धालुओं ने देखी वर्ष 2025 की अंतिम संध्या आरती

Religious process: रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में बुधवार दोपहर से ही कपाट बंद करने की धार्मिक प्रक्रिया शुरू हो गई। रात होते ही इस साल की अंतिम संध्या आरती का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरा मंदिर परिसर “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी आरती का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा किया।

🌸 पंचमुखी डोली ने लिया बाबा का आशीर्वाद

दिन में परंपरा के अनुसार पंचमुखी डोली को पूरे मंदिर परिसर में भ्रमण कराया गया और इसके बाद बाबा केदारनाथ ने गर्भगृह में प्रवेश किया। इसके साथ ही शीतकालीन बंद की तैयारियां शुरू हो गईं। मंदिर परिसर को इस अवसर पर करीब 12 क्विंटल फूलों से सजाया गया, जिससे पूरा क्षेत्र दिव्यता से भर गया।

🕉️ 23 अक्टूबर को भैयादूज पर बंद होंगे कपाट

भैयादूज के दिन, यानी 23 अक्टूबर की सुबह 4:30 बजे, बाबा केदारनाथ की अंतिम पूजा-अर्चना और अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद सुबह 8:30 बजे पंचमुखी डोली गर्भगृह से बाहर निकलेगी और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मंदिर के मुख्य व पिछले दोनों कपाट सील कर दिए जाएंगे।

🚩 बाबा की डोली की यात्रा का कार्यक्रम

  • पहला दिन (23 अक्टूबर): धाम से रामपुर तक 26 किमी की पैदल यात्रा।
  • दूसरा दिन (24 अक्टूबर): रामपुर से फाटा होते हुए गुप्तकाशी के विश्वनाथ मंदिर तक 17 किमी यात्रा।
  • तीसरा दिन (25 अक्टूबर): गुप्तकाशी से ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ तक 12 किमी की यात्रा — यही शीतकालीन गद्दीस्थल होगा।
    कुल मिलाकर डोली 55 किमी की पैदल यात्रा तय करेगी।

🙏 रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

चारधाम यात्रा के इस सीजन में अब तक 17 लाख 45 हजार श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं — जो पिछले साल की तुलना में एक लाख अधिक है। यह 2013 की आपदा के बाद दूसरा मौका है जब इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

🛕 प्रशासनिक तैयारियां पूरी

श्री बदरी-केदार मंदिर समिति के वरिष्ठ अधिकारी वाई.एस. पुष्पवाण ने बताया कि कपाट बंद करने, पूजा-अर्चना और डोली यात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुरक्षा और व्यवस्था की निगरानी समिति कर रही है।

❄️ धार्मिक परंपरा और श्रद्धा का संगम

धार्मिक परंपरा के अनुसार, शीतकाल के दौरान बर्फबारी के कारण ऊंचाई वाले धामों के कपाट बंद किए जाते हैं। इस अवधि में भगवान केदारनाथ की पूजा ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में की जाती है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और अगले छह माह तक श्रद्धालु ऊखीमठ में ही बाबा के दर्शन कर सकेंगे।

साभार… 

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