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Rule: 1 मार्च से बदल सकते हैं कई नियम: मोबाइल, रेलवे, एलपीजी और यूपीआई पर असर

1 मार्च से बदल सकते हैं कई नियम:

Rule: हर महीने की पहली तारीख की तरह इस बार भी 1 मार्च से कई नीतिगत और प्रशासनिक बदलाव लागू हो सकते हैं। इनका सीधा असर आम लोगों की दिनचर्या, डिजिटल लेनदेन और जेब पर पड़ सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं संभावित बदलावों के बारे में।


📱 सिम बाइंडिंग नियम लागू

मोबाइल यूजर्स के लिए नया “सिम बाइंडिंग” नियम लागू किया जा सकता है। इसके तहत WhatsApp और अन्य मैसेजिंग ऐप्स को उसी फोन के सक्रिय सिम से लिंक करना अनिवार्य होगा, जिसमें ऐप इस्तेमाल किया जा रहा है।

  • जिस डिवाइस पर ऐप चल रहा है, उसमें संबंधित सिम का होना जरूरी होगा।
  • वेब या डेस्कटॉप लॉगिन के लिए 6 घंटे का ऑटो लॉग-आउट नियम लागू हो सकता है।
  • 6 घंटे बाद वेब/डेस्कटॉप अपने आप लॉगआउट हो जाएगा।

इसका उद्देश्य फर्जी नंबरों, क्लोन सिम और साइबर अपराधों पर रोक लगाना है।


🚆 रेलवे का पुराना UTS ऐप बंद

1 मार्च से Indian Railways अपना पुराना UTS ऐप बंद कर सकता है।

  • अनारक्षित और प्लेटफॉर्म टिकट के लिए अब यात्रियों को नए Railone ऐप का उपयोग करना होगा।
  • शुरुआत में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं।
  • रेलवे का दावा है कि नया सिस्टम अधिक तेज, सुरक्षित और यूजर-फ्रेंडली होगा।
  • टिकट बुकिंग पर विशेष छूट या ऑफर भी दिए जा सकते हैं।

🛢️ एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव

हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की नई कीमतें जारी होती हैं। होली के त्योहार को देखते हुए उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद है।

कीमतों का अंतिम फैसला सरकार और तेल कंपनियों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।


🏦 न्यूनतम बैलेंस नियम में राहत संभव

कुछ सरकारी बैंक मिनिमम बैलेंस की गणना के तरीके में बदलाव कर सकते हैं।

  • पहले किसी एक दिन बैलेंस कम होने पर पेनल्टी लग जाती थी।
  • अब एवरेज मंथली बैलेंस (AMB) के आधार पर शुल्क तय किया जा सकता है।
  • पूरे महीने का औसत बैलेंस महत्वपूर्ण होगा।

इस बदलाव से ग्राहकों को पेनल्टी से बचने में आसानी हो सकती है।


💳 यूपीआई पेमेंट में बढ़ेगी सुरक्षा

डिजिटल भुगतान को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए बड़े ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त सुरक्षा लागू की जा सकती है।

  • केवल यूपीआई पिन पर्याप्त नहीं होगा।
  • बायोमेट्रिक या मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य किया जा सकता है।
  • उच्च राशि के लेनदेन पर अतिरिक्त वेरिफिकेशन लागू होगा।

इसका उद्देश्य ऑनलाइन फ्रॉड को कम करना और यूजर्स की सुरक्षा बढ़ाना है।


🏠 किराये के नियमों में संभावित बदलाव

रेंट एग्रीमेंट से जुड़े नियमों में भी बदलाव हो सकता है।

  • नए या रिन्यू होने वाले एग्रीमेंट के लिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जा सकता है।
  • सिक्योरिटी डिपॉजिट को अधिकतम दो महीने के किराए तक सीमित करने का प्रस्ताव।
  • मकान मालिक को घर में प्रवेश से पहले पूर्व सूचना देना अनिवार्य हो सकता है।

इन प्रावधानों का मकसद किरायेदार और मकान मालिक के बीच विवाद कम करना है।

साभार…

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