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Training: AI और मशीन लर्निंग आधारित फसल उपज मॉडलिंग पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

AI और मशीन लर्निंग आधारित फसल उपज मॉडलिंग

Training: भोपाल | मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भोपाल द्वारा कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से विज्ञान भवन, भोपाल में 7 से 9 अप्रैल तक तीन दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) आधारित फसल उपज मॉडलिंग पर केंद्रित है। इस प्रशिक्षण में मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 100 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में तकनीकी विकास को गति देना, और फसल बीमा दावों में पारदर्शितासटीक उपज अनुमान सुनिश्चित करना है।


AI तकनीकों का समावेश

तीन दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को SVM, Random Forest, Neural Network, CNN, XGB जैसे आधुनिक AI मॉडलों और डीप लर्निंग तकनीकों की जानकारी दी जा रही है।
प्रशिक्षण में विशेषज्ञों की भागीदारी निम्नलिखित संस्थानों से हो रही है:

  • राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC), ISRO, हैदराबाद
  • मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भोपाल
  • महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र (MNCFC), नई दिल्ली

रिमोट सेंसिंग से सटीक उपज पूर्वानुमान

AI व ML आधारित इस मॉडलिंग के तहत रिमोट सेंसिंग डेटा के ज़रिए फसलों की निगरानी और उपज का पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा। यह तकनीक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने में मददगार साबित होगी।

मध्यप्रदेश, देश का पहला राज्य है जिसने फसल बीमा योजना में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग वर्ष 2022 से शुरू किया है। अब इस तकनीक का दायरा अन्य राज्यों तक भी विस्तारित किया जा रहा है। परिषद राजस्थान सरकार के साथ भी तकनीकी भागीदार के रूप में कार्य कर रही है।


उद्घाटन कार्यक्रम में विशिष्ट उपस्थिति

प्रशिक्षण के उद्घाटन समारोह में

  • डॉ. अनिल कोठारी, महानिदेशक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद
  • संचालक, कृषि विभाग, मध्यप्रदेश शासन
  • कृषि मंत्रालय, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी
    विशेष रूप से उपस्थित रहे।

यह प्रशिक्षण कृषि क्षेत्र में एक तकनीकी क्रांति की दिशा में कदम है, जिससे किसान समुदाय को तेजी से, सटीक और पारदर्शी समाधान मिलेंगे। आने वाले वर्षों में इस प्रकार की तकनीकें कृषि आधारित निर्णयों और बीमा प्रक्रियाओं में विश्वसनीयता और दक्षता को नया आयाम देंगी।

साभार..

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