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Political Review: दो प्रतिद्वंदी-दोनों अध्यक्ष के दावेदार

दो प्रतिद्वंदी-दोनों

एक-दूसरे पर भारी पड़ चुके हैं दोनों

Political Review:बैतूल। राजनीति में कब क्या हो जाए? कहा नहीं जा सकता है। पल-पल बदलती राजनीति के जो दृश्य देखने में आ रहे हैं उससे तो यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि राजनीति में ऊंट कभी भी किसी भी करवट बैठ सकता है। वर्तमान में यही स्थिति बैतूल जिले के प्रमुख राजनैतिक दलों के संगठनात्मक चुनाव में दिखाई दे रही है जहां दो चिर प्रतिद्वंदी एक बार संगठन अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल दिखाई दे रहे हैं। यह बात अलग है कि एक का नाम प्रदेशाध्यक्ष के लिए चल रहा है तो दूसरे का नाम जिला अध्यक्ष के लिए सुनाई दे रहा है।


दो चुनाव में रहे आमने-सामने


2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से निलय डागा बैतूल विधानसभा सीट से चुनाव लड़े थे। यह उनके राजनैतिक जीवन का पहला चुनाव था जिसमें वे सफल होकर विधायक निर्वाचित हुए थे। वहीं 2013 में भाजपा से हेमंत खण्डेलवाल भी अपने जीवन में पहली बार भाजपा की टिकट पर बैतूल विधानसभा सीट से चुनाव लडक़र निर्वाचित हो चुके थे लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस के निलय डागा ने पराजित कर दिया था। जिसका राजनैतिक बदला उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में लिया। और कांग्रेस के निलय डागा को पराजित कर हेमंत खण्डेलवाल पुन: विधायक बन गए। इस तरह से दोनों ही प्रमुख दलों के दोनों प्रतिद्वंदियों ने एक बार हार और एक बार जीत का स्वाद चखा।


दोनों में हैं कई समानता


राजनैतिक और सामाजिक स्तर पर हेमंत खण्डेलवाल और निलय डागा में कई समानता दिखाई देती है। जिनमें सामाजिक एवं आर्थिक स्तर पर दोनों ही परिवार संपन्नता की श्रेणी में आते हैं। हेमंत खण्डेलवाल के पिता स्व. विजय खण्डेलवाल जहां भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष एवं जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहे वहीं निलय डागा के पिता स्व. विनोद डागा भी कांग्रेस के प्रदेश कोषाध्यक्ष एवं जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहे हैं। हेमंत और निलय दोनों ही ने मध्यप्रदेश विधानसभा बैतूल जिले का प्रतिनिधित्व किया है।


ऐसे आगे निकले हेमंत


लंबे समय से सत्तारूढ़ भाजपा के जिले के सबसे प्रभावशाली नेता के रूप में हेमंत खण्डेलवाल ने राज्य स्तर पर अपनी अलग पहचान बना ली है। जिला भाजपा संगठन में 2010 से 2013 तक जिलाध्यक्ष निर्वाचित होने वाले श्री खण्डेलवाल 2008 में सांसद भी बने थे। इसके बाद वे पार्टी में लगातार आगे बढ़ते गए। प्रदेश भाजपा कोषाध्यक्ष, कुशाभाऊ न्यास के अध्यक्ष, मध्यप्रदेश भाजपा संगठन के निर्वाचन अधिकारी, स्थानीय चुनाव में नर्मदापुरम संभाग के भाजपा चुनाव संयोजक, प्रदेश भाजपा कार्यालय निर्माण समिति के प्रमुख होने के साथ-साथ अब उनका नाम प्रमुखता के साथ मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए सुनाई दे रहा है। और संभावना बताई जा रही है कि जिस तरह से प्रदेश में हेमंत खण्डेलवाल को जिम्मेदारी मिलती जा रही है उससे इन्हें प्रदेशाध्यक्ष का पद भी मिल जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।


ऐसे पिछड़े निलय डागा


2018 में पहली बार चुनाव लडक़र बैतूल सीट से विधायक बने निलय डागा आर्थिक रूप से संपन्न होने के साथ-साथ युवा नेता के रूप में आगे बढ़े। लेकिन 2018 में ही जिले के दूसरे कांग्रेस विधायक सुखदेव पांसे के कमलनाथ मंत्री मंडल में शामिल होने के बाद श्री पांसे की जिले की राजनीति में तेजी से ताकत बढ़ी इसका राजनैतिक नुकसान निलय डागा को हुआ। और 15 महीने में सरकार गिर गई जिससे सत्ताधारी विधायक के रूप में काम कर रहे निलय डागा को विपक्ष में बैठना पड़ा। 2023 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद श्री डागा को अपना राजनैतिक वजूद बनाए रखने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। हालांकि प्रदेश कांग्रेस ने प्रदेश स्तर पर जिम्मेदारी दी है और हरदा जिले का प्रभारी बनाया है वहीं हाल फिलहाल में कांग्रेस के नए जिलाध्यक्ष के लिए आए पर्यवेक्षकों के सामने रायशुमारी में निलय डागा और उनके समर्थकों ने मजबूती से अपने नेता का नाम सामने किया है जिससे यह माना जा रहा है कि निलय डागा को बैतूल जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिल सकती है।

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