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Case: सिरप से मौत का सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

सिरप से मौत का सुप्रीम

अब तक 17 बच्चों की हो चुकी है मौत

Case: नई दिल्ली(ई-न्यूज)। कोल्ड्रिफ सिरप पीने से मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में 17 बच्चों की दुखद मौत का समाचार सामने आया है। इस मामले में अब याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई है। जिसमें दवा कंपनी और संबंधित आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही किए जाने की बात कही गई है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से बच्चों की मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। इसमें मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या सीबीआई के जरिए गठित एक्सपर्ट कमेटी से कराने की मांग की गई है।
याचिका लगाने वाले वकील विशाल तिवारी ने कहा है कि आरोपी कंपनी द्वारा बनाई गई सभी दवाओं की बिक्री और डिस्ट्रीब्यूशन पर तुरंत रोक लगाई जाए। केंद्र सरकार और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन को देशभर में ऐसी दवाएं में डाय एथिलिन ग्लायकॉल और एथिलिन ग्लायकॉल की जांच कराने का आदेश दिया जाए। याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार को ड्रग रिकॉल पॉलिसी और टॉक्सिकोलॉजिकल सेफ्टी प्रोटोकॉल तैयार करने के निर्देश भी दिए जाएं।


मध्य प्रदेश सरकार ने एसआईटी बनाई


सीएम डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य को हटा दिया है। उन्होंने खाद्य एवं औषधि प्रशासन के उपसंचालक शोभित कोष्टा, छिंदवाड़ा के ड्रग इंस्पेक्टर गौरव शर्मा और जबलपुर ड्रग इंस्पेक्टर शरद जैन को सस्पेंड करने के निर्देश भी दिए हैं। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संचालक दिनेश श्रीवास्तव को फूड और ड्रग कंट्रोलर का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। सरकार ने मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई है। जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट और मंडला जिलों के ड्रग इंस्पेक्टर शामिल हैं।


सरकार ने माना केमिकल टॉक्सिसिटी से हुई मौतें


भोपाल में सोमवार को हुई राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की बैठक में प्रमुख सचिव संदीप यादव ने बताया कि छिंदवाड़ा में बच्चों की मृत्यु के सभी पहलुओं की गहन जांच की गई। बच्चों के रीनल बायोप्सी रिपोर्ट में पाया गया कि मौत एक्यूट ट्यूबुलर नेक्रोसिस के कारण हुई, जो किसी केमिकल टॉक्सिसिटी की ओर इशारा करता है। बैठक में तय हुआ कि अब डॉक्टर बच्चों को कोई भी सिरप लिखते समय अतिरिक्त सावधानी बरतेंगे। वहीं, फार्मेसी में बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट के दवाओं की बिक्री को लेकर भी सरकार ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। बैठक में यह भी तय किया गया कि केंद्र और राज्य के दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो। साभार…

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