कुपोषण खत्म करने डॉ. प्रांजल उपाध्याय के नवाचार को सराहा
Innovation: बैतूल। काम ऐसा करो की पहचान बन जाए… कदम ऐसा रखो की निशान बन जाए…. दुनिया में जिंदगी तो यहां सभी जीते हैं…. कुछ ऐसा करके जाओ की मिसाल बन जाए…. लिखी गई इन पंक्तियों के एक-एक शब्द को जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. प्रांजल भार्गव ने सच करने का जब प्रयास किया तो उनके नवाचार को बैतूल आए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी उनकी कार्यप्रणाली को देखकर इतना अधिक प्रभावित हुए उन्होंने डॉ. प्रांजल उपाध्याय की पीठ ठोंककर उन्हें प्रोत्साहित भी किया। निश्चित रूप से डॉ. उपाध्याय के द्वारा कुपोषण खत्म करने किए गए नवाचार को मिली केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मिली शबासी अन्य चिकित्सकों को भी ऐसे प्रेरणादायक कार्य करने के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
बिना वेतन के भीमपुर में दी सेवाएं
डॉ. प्रांजल उपाध्याय ने साल 2021 में ट्रायल हेल्थ पर काम करने के उद्देश्य से आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र भीमपुर में एक साल तक स्वेच्छा से बिना वेतन के स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दी। इस दौरान उन्होंने भीमपुर क्षेत्र के गांवों में जाकर स्वास्थ्य समस्याओं को समझा और उसके निराकरण के लिए रिसर्च भी की। इसके बाद सितम्बर 2022 में उनका चयन एनएचएम में हो गया था और उनकी पोस्टिंग भीमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बतौर मेडिकल ऑफिसर के रूप में हुई। यहां पर लगभग ढाई साल तक काम किया और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सभी प्रयास किए। उन्होंने सीएचसी को भी बेहतर बनाने के लिए कई प्रयोग किए जिसमें अस्पताल की दीवारों पर हिन्दी के अलावा गोंडी भाषा में भी स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं की जानकारी लिखवाई जिससे आदिवासी वर्ग के लोगों को अस्पताल में मिलने वाली सेवाओं की जानकारी मिल सके।
स्वास्थ्य सेवाओं पर लिखी पुस्तक
डॉ. प्रांजल उपाध्याय ने बताया कि ट्रायल हेल्थ पर कार्य करने के साथ ही उनके द्वारा रिसर्च किया गया और इस रिसर्च के बाद उन्होंने एक पुस्तक लिखी है जिसका नाम द लिटरेचर ऑफ ट्रायवल हेल्थ है। इस पुस्तक में सामान्य बीमारियों के अलावा कई जटिल बीमारियों का भी उल्लेख किया गया है। उनके रिसर्च में सामने आया कि आदिवासी क्षेत्रों में अज्ञानता के चलते लोग इलाज कराने में विश्वास नहीं करते हैं बल्कि झाडफ़ंूड और भगत भूमका पर ज्यादा भरोसा रहता है। यही कारण है कि कई बार उपचार समय पर नहीं मिलने से कई मरीजों की जान चली जाती है। इसको लेकर उन्होंने क्षेत्र में जागरूकता लाने के लिए विभिन्न प्रयास किए जो सफल रहे। इसके अलावा जो लोग प्रसव के लिए महिलाओं को अस्पताल नहीं लाते थे अब वह धीरे-धीरे अस्पताल लाने लगे हैं जिसके चलते मातृ-शिशु मृत्यु दर में भी कमी आ रही है।
टीकाकरण के प्रति किया जागरूक
आदिवासी क्षेत्रों में टीकाकरण को लेकर भी एक बड़ी चुनौती स्वास्थ्य विभाग के सामने रहती है। कहीं पहुंच मार्ग नहीं है तो कहीं अज्ञानता के चलते लोग बच्चों का टीकाकरण नहीं कराते हैं। इसको लेकर डॉ. प्रांजल उपाध्याय ने अपनी टीम के साथ बेहतर कार्य किया है और ऐसे पहुंचविहीन गांव में पहुंचे हैं जहां जाने में पैदल चलना पड़ता है। कई जगह नदी पार करनी पड़ती है तो कहीं जगह पहाड़ भी चढऩा पड़ता है लेकिन उनकी कोशिश है कि अंतिम छोर पर रह रहे बच्चे तक टीकाकरण कार्य किया जाए और उन्हें इस कार्य में सफलता भी मिली है जिसको लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उनकी सराहना भी की है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने दी शबासी
मेडिकल कालेज के शिलान्यास कार्यक्रम में शासकीय विभागों की प्रदर्शनी लगी थी। जिसमें स्वास्थ्य विभाग की भी प्रदर्शनी शामिल थी। जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अन्य अतिथि अवलोकन के लिए पहुंचे तो डॉ. प्रांजल उपाध्याय ने उनके द्वारा किए गए पोषण क्लीनिक के नवाचार की जानकारी देते हुए उन्हें बताया कि यह पोषण क्लीनिक कैसे कुपोषित बच्चों को पोषित करने के लिए कार्य कर रहा है। इस जानकारी के मिलने के बाद श्री नड्डा अपने आप को नहीं रोक पाए और उन्होंने डॉ. प्रांजल उपाध्याय को शबासी देते हुए उनकी पीठ थपथपा दी।
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