न्यूनतम तापमान गिरकर पहुंचा 9.2 डिग्री पर
Fog: बैतूल। इस बार ठण्ड के सीजन का सबसे घना कोहरा सोमवार को पड़ा। कोहरे की स्थिति यह थी कि 50 मीटर का भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था। ठण्ड और कोहरे की वजह से सुबह की सैर करने वालों में भी काफी कमी दिखाई दी। ठण्ड और कोहरे की वजह से फसलों पर भी पाला पडऩे का डर किसानों को सताने लगा है। सोमवार को न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री सेल्सियस पर आ गया जिससे समूचा जनजीवन ठिठुरने को मजबूर हो गया। ठण्ड और कोहरे की वजह से हालत यह थी कि वाहन चालकों को अपनी वाहनों के हैड लाइट जलाकर वाहन जलाने को मजबूर होना पड़ रहा था। हाईवे पर भी वाहन रेंगते हुए नजर आ रहे थे।
ठण्ड का जारी है सितम
बैतूल में ठंड ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। सोमवार को न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो रविवार के 11.5 डिग्री से करीब दो डिग्री कम है। अधिकतम तापमान में भी गिरावट आई है। सुबह घना कोहरा छाने से दृश्यता कम रही, जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। तापमान में बेहद कमी आने से लोगों को गर्म कपड़ों से लदे हुए देखा जा रहा है। दिन में भी धूप गुनगुनी लगने लगी है।
दस दिनों से मौसम में उतार-चढ़ाव
पिछले दस दिनों से बैतूल में मौसम में लगातार बदलाव देखा जा रहा है। 26 दिसंबर को न्यूनतम तापमान 9.8 डिग्री था, जो 27 दिसंबर को 8.7 डिग्री और 28 दिसंबर को 8.5 डिग्री तक गिर गया था। नए साल की शुरुआत में ठंड से कुछ राहत मिली थी। 2 जनवरी को न्यूनतम तापमान 11 डिग्री और 3 जनवरी को 12.5 डिग्री तक पहुंच गया था। हालांकि जनवरी के पहले सप्ताह के अंत में ठंड ने फिर से वापसी कर ली है और तापमान एक बार फिर एक अंक में आ गया है।
ठंडी हवाओं से बढ़ी सर्दी
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर दिशा से आ रही ठंडी हवाओं और साफ आसमान के कारण रात के तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। आने वाले दिनों में सुबह और शाम की सर्दी और बढऩे की संभावना जताई गई है।लगातार कोहरे और कम धूप का असर कृषि पर भी दिखाई देने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कोहरे के कारण चना और मटर जैसी फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। खेतों में अधिक नमी से फसल रोग फैलने का खतरा बना हुआ है।
किसानों को दी गई सलाह
किसानों को सलाह दी गई है कि वे सुबह के समय छिडक़ाव और सिंचाई से बचें। शाम होते ही ठंडी हवाएं चलने लगती हैं, जिससे तापमान तेजी से गिरता है और गलन बढ़ जाती है। दिसंबर के अंत में चरम पर रही सर्दी, जनवरी के पहले सप्ताह में थोड़ी राहत के बाद अब फिर से अपना असर दिखा रही है। किसानों को अब यही डर सता रहा है कि कहीं फसलों पर पाला ना पड़ जाए।
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