डॉ. आनंद मालवीय और डॉ. आयुष श्रीवास्तव ने छोड़ी सेवाएं
Resign: बैतूल। जिला अस्पताल वैसे भी डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है और ऐसे में दो डॉक्टर इस्तीफा दे देंगे तो स्वास्थ्य सेवाओं की क्या स्थिति रहेगी। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। जिला अस्पताल में पदस्थ वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आनंद मालवीय और शिशु रोग विशेष डॉ. आयुष श्रीवास्तव ने इस्तीफा दे दिया है।
15 साल सेवाएं दी डॉ. आनंद मालवीय ने
डॉ. मालवीय ने जून 2011 में बैतूल जिला अस्पताल में कार्यभार संभाला था। इससे पूर्व उन्होंने भोपाल के प्यूपिल्स हॉस्पिटल में दो वर्ष तक मेडिसिन विभाग में सेवा दी। उन्होंने 1998 बैच में इंदौर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी, जिसके बाद उज्जैन मेडिकल कॉलेज में एक वर्ष और हैदराबाद के फैजान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में तीन वर्ष तक डीएनबी मेडिसिन की ट्रेनिंग ली।
मॉडल अधिकारी के रूप में योगदान दिया
डॉ. मालवीय अपने सौम्य स्वभाव और कार्य के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते थे। उनके कार्यकाल में टीबी नियंत्रण कार्यक्रम में जिले ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। उन्हें वर्ष 2019 के लिए 2020 में ‘ब्रॉन्ज अवॉर्डÓ और 2023 में ‘सिल्वर नेशनल अवॉर्डÓ से सम्मानित किया गया था। उन्होंने एचआईवी कार्यक्रम में भी एक मॉडल अधिकारी के रूप में योगदान दिया। डॉ. मालवीय ने बताया कि अब वे निजी क्षेत्र में काम करने की योजना बना रहे हैं और अपने स्वयं के अस्पताल की शुरुआत की तैयारी कर रहे हैं।
6 साल सेवाएं दी डॉ. श्रीवास्तव ने
जिला अस्पताल में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आयुष श्रीवास्तव पिछले 6 साल से जिला अस्पताल में सेवाएं दी रहे थे, उन्होंने बताया कि निजी कारणों से 27 नवम्बर 2025 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया था और एक महीने नोटिस पीरिएड के दौरान 27 दिसम्बर तक जिला अस्पताल में सेवाएं दी। डॉ. श्रीवास्तव का कहना है कि उनके पिताजी स्वॅ. अरूण श्रीवास्तव जी ने निजी हास्पीटल बनाया था और उसको उसको संचालित करने के लिए उसी में सेवाएं देंगे। डॉ. श्रीवास्तव जिला अस्पताल में नवजात गहन चिकित्सा इकाई के इंचार्ज थे।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की स्थिति और भी चिंताजनक है। 31 स्वीकृत पदों में से केवल 11 विशेषज्ञ डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जबकि 20 पद खाली पड़े हैं। हाल ही में डॉ. राहुल शर्मा (नेत्र रोग विशेषज्ञ), डॉ. प्रतिभा रघुवंशी (स्त्री रोग विशेषज्ञ) और डॉ. आयुष श्रीवास्तव भी अस्पताल छोड़ चुके हैं।
डॉक्टरों के लगातार इस्तीफों के कारण जिला अस्पताल में मरीजों को इलाज के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के सामने अब डॉक्टरों की कमी एक बड़ी चुनौती बन गई है।
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