Clash: प्रयागराज। माघ मेले में ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच टकराव और गहरा हो गया है। वसंत पंचमी के पावन स्नान के दिन भी शंकराचार्य ने संगम में डुबकी लगाने से इनकार कर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि जब तक प्रशासन अपने व्यवहार के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता, तब तक वे कोई भी स्नान नहीं करेंगे।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा,
“मेरा मौनी अमावस्या का स्नान अभी तक नहीं हुआ है, तो वसंत पंचमी का स्नान कैसे कर लूं? प्रशासन सिर्फ नोटिस-नोटिस का खेल खेल रहा है, समाधान नहीं निकाल रहा।”
दरअसल, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य पालकी में संगम स्नान के लिए जा रहे थे। उस समय सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पैदल जाने को कहा। इस दौरान उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई, जिससे नाराज होकर शंकराचार्य ने स्नान से इनकार कर दिया और अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे।
इस विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाम लिए बिना कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा,
“किसी को भी परंपराओं को बाधित करने का अधिकार नहीं है। कुछ कालनेमि लोग धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों से सतर्क रहने की जरूरत है।”
वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य के प्रति नरम रुख दिखाते हुए आजमगढ़ में कहा,
“मैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम करता हूं। उनसे प्रार्थना है कि वे स्नान कर इस विषय का समापन करें।”
इसी बीच, माघ मेले में वसंत पंचमी का स्नान सुबह चार बजे से जारी है। संगम नोज पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। हजारों साधु-संत और श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। गुरुवार शाम योग गुरु बाबा रामदेव ने भी सतुआ बाबा के साथ संगम में स्नान किया। अयोध्या रवाना होने से पहले उन्होंने शंकराचार्य विवाद पर कहा,“साधुओं को अभिमान नहीं करना चाहिए। इस तरह के विवाद से सनातन धर्म का अनादर होता है।”
फिलहाल, प्रशासन और शंकराचार्य के बीच गतिरोध बना हुआ है। वसंत पंचमी जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर शंकराचार्य का स्नान न करना इस विवाद को और गंभीर बना रहा है, जिससे धार्मिक और राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।
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