सरस्वती विद्या मंदिर गाड़ाघाट में हुआ माँ सरस्वती का हवन-पूजन
Events: बैतूल। बसंत पंचमी को लेकर ऐसी मान्यता है कि इसी दिन माँ सरस्वती का प्राकट्य हुआ था इसलिए यह पर्व छात्रों, शिक्षकों और कलाकारों के लिए विशेष महत्व रखता है। माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आने वाली बसंत पंचमी से बसंत रथ की भी शुरुआत मानी जाती है। उक्त उद्गार नगर पालिका की ब्रांड एम्बेसेडर श्रीमती नेहा गर्ग ने किया। उन्होंने कहा कि माँ सरस्वती का जन्म होने से पहले सृष्टि में कोई सुर या साज नहीं था जिससे पूरी सृष्टि ही बेजान थी लेकिन ब्रम्हा जी ने माँ सरस्वती की उत्पत्ति की और जब माँ सरस्वती ने अपनी वीणा की तान दी तो पूरे जगत में धुन, साज गूंज उठी।

सरस्वती विद्या मंदिर गाड़ाघाट में हुआ आयोजन

इसी के तहत आज सरस्वती विद्या मंदिर गाड़ाघाट बैतूल में बसंत पंचमी पर विद्या की देवी माँ सरस्वती का हवन पूजन किया गया। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में आनंदधाम की सदस्य एवं समाजसेवी श्रीमती बिंदू मालवीय ने अपने उद्बोधन में बताया कि सरस्वती शिशु मंदिर और विद्या मंदिर के माध्यम से सनातन संस्कृति और अच्छे संस्कार बच्चों को दिए जाते हैं जिससे वे भविष्य में एक अच्छा इंसान बन सके। इसी कड़ी में आज सरस्वती विद्या मंदिर में बसंत पंचमी के पर्व पर यह आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाजसेवी हरिश गढ़ेकर एवं श्री राममंदिर, श्री शिव मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी सचिव नवनीत गर्ग ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन शाला की प्राचार्य श्रीमती प्रीति बाथरी ने किया।

क्यों मनाया जाता है बसंत पंचमी पर्व
बसंत पंचमी का त्योहार को बसंत ऋतु की आगमन का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन लोग सरस्वती पूजन करते हैं और व्रत रखते हैं। हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से ये एक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी या श्री पंचमी के दिन माता सरस्वती का अवतरण हुआ था। इसीलिए हर वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है।
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